कई घोटाले उजागर किए, क्या अब है क्रिकेट की बारी?

5 वर्ष पहले
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अयाज मेमन की कलम से...
 
 
पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय अब बीसीसीआई के नए बॉस होंगे। बीसीसीआई ने पिछले दो दशक में एन. श्रीनिवासन, जगमोहन डालमिया, आईएस बिंद्रा जैसी हस्तियों को बीसीसीआई को संचालित करते देखा। अब पहली बार क्रिकेट बिरादरी से बाहर की हस्ती पर जिम्मेदारी आई है। उन्होंने कोयला आवंटन और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले उजागर किए थे। जाहिर है कि उनसे योग्य विकल्प नहीं मिला होगा। वैसे यह भी कहा जा रहा है कि विनोद राय एनडीए सरकार के करीबी हैं, शायद इसलिए उन पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। मेरा मानना है कि विनोद राय अच्छे से जानते हैं कि उनका कार्यकाल कुछ महीनों का है। वे इस दौरान बीसीसीआई को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। हो सकता है कि बीसीसीआई का कोई बड़ा घोटाला ही उजागर कर दें।
 
इस समिति में बीसीसीआई से जुड़ा एक भी व्यक्ति का नहीं होना आश्चर्यचकित करने वाला इसलिए नहीं है क्योंकि लोढ़ा समिति ने तो पहले ही बीसीसीआई के पदाधिकारियों का सफाया कर दिया है। इस समिति में बिशन सिंह बेदी जैसे व्यक्तित्व को होना चाहिए था लेकिन वे 70 प्लस उम्र के होने के कारण नहीं लिए गए। डायना ने महिला क्रिकेट के विकास के लिए काफी मेहनत की है। रामचंद्र गुहा को क्रिकेट की अच्छी समझ है। विक्रम लिमये को प्रशासन और वित्त की अच्छी समझ है।
 
अप्रैल में आईपीएल का आयोजन होगा। नई समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह आईपीएल और उससे पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज को सफलतापूर्वक संचालित करें। 
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