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अब तीनों फार्मेट में अंपायर के फैसले को दे सकेंगे चुनौती, DRS पर फैसला मई तक

5 वर्ष पहले
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दुबई.    इंटरनेशल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी20 में अब एक समान डीआरएस के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी है। यह सिस्टम अक्टूबर से लागू हो जाएगा। आईसीसी की दो दिन की मीटिंग में इस पर फैसला लिया गया। बता दें कि  इसमें हॉकआई, हॉट स्पॉट, अल्ट्रा एज, रियल टाइम स्निको तकनीक का इस्तेमाल सही फैसले लेने के लिए किया जाता है। इसमें इस बात का भी प्रपोजल रखा गया कि सीरीज में भी आईसीसी ही डीआरएस का खर्चा उठाएगी। लंदन में इस पर मुहर लगेगी... 
 
 
- आईसीसी की लंदन में होने वाली मीटिंग में इस फैसले पर आखिरी मुहर लगेगी। यह मीटिंग जून में होगी। 
 
एमआईटी से परमिशन जरूरी
- आईसीसी ने साफ किया है कि जो भी ऑर्गनाइजेशन डीआरएस तकनीक मुहैया कराएंगे, उनके लिए मैसाचुसेट्स तकनीकी संस्थान (एमआईटी) से पहले इसकी जांच और सहमति हासिल करना भी अनिवार्य होगा।
- उसके बाद ही मैचों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। पिछले साल डीआरएस में उपयोग की जाने वाली तकनीक हॉकआई, हॉट स्पॉट, अल्ट्रा एज, रियल टाइम स्निको की भी एमआईटी में जांच कराई गई थी।
- डीआरएस का इस्तेमाल अभी बड़े पैमाने पर नहीं होने से यह तकनीक अभी महंगी है। इसलिए आईसीसी खुद इसका खर्च उठाएगी। 
 
डीआरएस पर आईसीसी का कंट्रोल जरूरी है 
- आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने भी माना कि डीआरएस पर ज्यादा कंट्रोल जरूरी है। 
- अभी तक डोमेस्टिक ब्रॉडकास्ट ही डीआरएस का खर्चा उठाते हैं और कुछ मामलों में घरेलू क्रिकेट बोर्ड भी पैसा देता है। 
 
महिला विश्व कप में पहली बार होगा इस्तेमाल
- आईसीसी ने कहा, "डीआरएस तकनीक काे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस्तेमाल करने के फैसले पर सहमति जताई गई है।"
- "मई में आईसीसी की क्रिकेट काउंसिल इसके इस्तेमाल पर चर्चा करेगी और जून 2017 में इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा, जिसके बाद इसी साल अक्टूबर में इसे लागू किया जाएगा।"
- साथ ही, यह पहला मौका होगा जब वेस्ट इंडीज में 2018 में होने वाले आईसीसी ट्वेंटी 20 महिला विश्व कप टूर्नामेंट में भी डीआरएस का इस्तेमाल किया जाएगा, जहां हर टीम को एक एनालिसिस का मौका दिया जाएगा।
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