नई दिल्ली. आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में एन. श्रीनिवासन को तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ कहा कि उन्हें बीसीसीआई या
आईपीएल की अपनी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स में किसी एक को चुनना होगा।
कोर्ट ने श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ जल्द कार्रवाई के निर्देश भी दिए। मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। इससे पहले जस्टिस टीएस ठाकुर और एफएमआई कलीफुल्ला की बेंच ने बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन को फटकार लगाई। क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में हिस्सा लिया था।
कोर्ट ने कहा, ‘आपको बोर्ड की गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया था। आपने फिर भी ऐसा लिया।’ श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने गलती मानते हुए तुरंत माफी मांग ली। सिब्बल ने कहा कि श्रीनिवासन ने बोर्ड के नियम नहीं तोड़े हैं? इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता।
इस पर कोर्ट ने कहा, ‘लेकिन स्पष्ट है कि आपने अपने फायदे के लिए बोर्ड के नियम बदल लिए।’ ‘हम मयप्पन के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं। सजा का निर्णय कैसे किया जाए और अवधि क्या हो? यह बोर्ड तय करे। इसमें श्रीनिवासन का दखल न हो।’ कोर्ट ने साफ किया कि वह बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
सोशल मीडिया पर टिप्पणियाें को लेकर गिरफ्तारी गंभीर मामला
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की दलील पर असहमति जताई कि सोशल वेबसाइट्स पर आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट करने की कुछ घटनाओं में ही गिरफ्तारियां हुई हैं। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि अगर ऐसे मामले अपवाद भी थे, तब भी उनमें गिरफ्तारियां करना निरंकुश और गंभीर मामला है। एक जनहित याचिका पर मंगलवार को जस्टिस जे. चेलमेश्वर की बेंच ने सुनवाई की। यह सुनवाई आईटी कानून की धारा-66 ए पर हुई जो विवादों में है। यह धारा आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार कर तीन साल को जेल भेजने का अधिकार प्रशासन को देती है।