(L-R) विनेश, बबिता और गीता फोगाट।
खेल डेस्क. फीला
रेसलिंग हो या हो कॉमनवेल्थ गेम्स भारतीय महिला रेसलिंग में एक ऐसा नाम है, जिसने वर्ल्ड लेवल पर भारत का नाम रोशन किया। जी हां, वह गीता फोगाट ही हैं। 15 दिसंबर, 1988 को हरियाणा के भिवानी जिले में जन्मी गीता ने 13 साल की उम्र में रेसलिंग की शुरुआत की थी और आज उन्होंने जो भी चाहा उसे हासिल किया। उनके सफल करियर को देखते हुए उनकी दो अन्य बहनें बबिता और विनेश भी उन्हीं के पद चिह्नों पर चलीं। परिणाम हमारे सामने है, ये तीनों ही बहने आज वुमेंस रेसलिंग में सुपरहिट हैं।
ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली महिला खिलाड़ी
गीता भारत की पहली महिला खिलाड़ी है, जिन्होंने ओलिंपिक में कुश्ती के लिए क्वालिफाई किया। कर्णम मल्लेश्वरी को पहली बार ओलिंपिक में मेडल जीतते देख गीता के पिताजी महावीर सिंह को भी लगा कि उनकी बेटियां भी खेलों में पदक जीत सकती हैं। इसके बाद उन्होंने घर पर बने अखाड़े में ही ट्रेनिंग देना शुरू किया। उस समय गीता की उम्र 13-14 साल की थी। गीता के पिता खुद राज्य स्तरीय पहलवान और बेटी के कोच हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद महावीर ने बेटी की जिद पर उसे ट्रेनिंग के लिए एनआईएस, पटियाला भी भेजा।
गीता फोगाट
* 2012 के FILA रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में ब्रॉन्ज मेडल
* 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल
* 2009 में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल
* 2012 में हुए FILA एशियन ओलिंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल
बबीता कुमारी फोगाट
* 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल
* 2012 की वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में ब्रॉन्ज मेडल
* 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल
विनेश फोगाट
* 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल
* एशियन गेम्स-2014 में ब्रॉन्ज मेडल
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