फोटो: कोलंबियन क्लिफ डाइविंग टीम छलांग लगाते हुए। इसी टीम ने अब तक 9 बार वर्ल्ड सीरीज का खिताब जीता है।
खेल डेस्क. हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक की फिल्म में हीरो को स्टंट करते हुए तो देखा ही होगा आपने। उसके इस खतरनाक शॉट के लिए अधिकतर डूप्लीकेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसे फिल्माए जाने के लिए लंबे तामझाम और सुरक्षा के लिए तरह-तरह की चीजों का उपयोग होता है। कई बार तो आधुनिक कैमरे के कमाल से आसानी से स्टंट को मूर्त रूप दे दिया जाता है। लेकिन, यहां न तो सुरक्षा के लिए अधिक तामझाम होते हैं और ना ही कोई डूप्लीकेट। क्लिफ डाइविंग (चट्टान से छलांग) ऐसा खेल है, जिसमें स्पोर्ट्स स्टार खुद पहाड़ों से छलांग लगाता है। 11 दिसंबर को इंटरनेशनल माउंटेन डे मनाया जाता है। इस मौके पर
Dainikbhaskar.com आपको क्लिफ डाइविंग से रुबरु करवा रहा है।
1770 में हुई खतरनाक खेल की शुरुआत
क्लिफ डाइविंग खेल की शुरुआत 1770 में यूनाइटेड स्टेट्स के 'आईलैंड लानाई' (कौनोलू) में हुआ, जिसे वहां के राजा कमेहमेहा ने शुरू किया था। उनके लिए यह केवल एक एडवेंचर था। चुकी वहां आईलैंड था, इसलिए वहां के लिए यह किसी खेल से कम नहीं होता था। लानाई में इस खेल को 'लेले कावा' कहा जाता है, जिसका इंग्लिश में अर्थ- 'उची चट्टान से ऐसी छलांग, जिसमें छलांग लगाने वाले का पैर पहले पानी के अंदर जाए'।
राजा के मरने के बाद धूमिल हुआ खेल
राजा कमेहमेहा के मरने के बाद क्लिफ डाइविंग को एक तरह से भुला दिया गया, लेकिन स्थानीय नागरिकों के बीच यह खेल कभी नहीं रुका। यहां समय-समय पर विश्वभर से लोग आते रहे और क्लिफ डाइविंग सीखते रहे। लेक और आईलैंड वाले देशों में यह खेल खेला जाता रहा।
2000 में शुरू हुआ असल खेल
क्लिफ डाइविंग को शुरू होने के 230 साल बाद 2000 में इसे फिर कौनोलू में कुछ लोगों ने मिलकर शुरू किया। इस खेल के प्रचार-प्रसार के लिए बाकायदा एक वर्ल्ड लेवल का टूर्नामेंट कराया गया, जिसे क्लिफ डाइविंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप का नाम दिया गया। यह टूर्नामेंट वर्ल्ड हाई डाइविंग फेडरेशन (WHDF) ने आयोजित किया।
थोड़ी सी चूक बन सकती है मौत का कारण
डाइविंग करते वक्त बहुत सावधानी बरतनी होती है। यदि डाइवर पेट या सिर के बल गिरता है तो उसकी मौत भी हो सकती है। डाइविंग से पहले डाइवर की हर्ट बिट का भी ध्यान रखा जाता है, ऊंचाई से पानी के अंदर गिरने के दौरान घबड़ाहट के कारण हर्ट अटैक अा सकता है। जैसे ही डाइवर पानी के अंदर गिरता है, वहां पहले से चौकन्ना लगभग 10 लोगों की क्रू टीम (सहायता के लिए) तुरंत पहुंचकर डाइवर को फोम के पैड पर लिटा देते हैं। इससे डाइवर की मौजूदा स्थिति के बारे में तो पता चलता ही है, अगर वह चोटिल है या कोई दिक्कत है तो उपचार में भी समय नहीं लगाते।
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