खेल डेस्क. खा-पीकर पहलवान बनना तो बड़ा ही आसान होता है। नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर उस स्वस्थ बॉडी का उपयोग तो कोई सुशील यादव और योगेश्वर दत्त से सीखे। ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड कुश्ती चैम्पियनशिप और अब एशियाड। कोई भी वर्ल्ड लेवल का टूर्नामेंट नहीं है, जिसमें हरियाणा में DSP पद पर नियुक्त पहलवान योगेश्वर दत्त ने अपने बल का जौहर नहीं दिखाया हो।
देखा जाए तो युवाओं में सिक्स पैक का क्रेज जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। जिम में सिट अप्स करते बड़ी संख्या में युवा देखे जा सकते हैं, लेकिन सिक्स पैक का असल उपयोग तो योगेश्वर दत्त ही कर रहे हैं। उनके बल पर ही विदेशों में कुश्ती पर भारत ने धाक जमाई है। बता दें कि सिक्स पैक बोलने में तो दो शब्द भर है, लेकिन इस एब्स को अपने शरीर में उभारने में सालों पसीना बहाना पड़ता है।
करिश्माई पहलवान और ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने इंचियोन
एशियाई खेलों की कुश्ती प्रतियोगिता में इतिहास रचते हुए भारत को 28 साल के लम्बे अंतराल के बाद एशियाड कुश्ती में स्वर्ण पदक दिला दिया। राष्ट्रमंडल खेलों के गोल्ड मेडल विजेता और महाबली सतपाल के शिष्य योगेश्वर ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के गोल्ड मेडल मुकाबले में तजाकिस्तान के जालिमखान युसूपोव को बेहद नजदीकी संघर्ष में 1-0 से हराया।
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