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कॉमनवेल्थ गेम्स 2018: विश्व की 20% जमीन और 33% आबादी वाले 53 देशों की 71 टीमें 12 दिन खेल के मैदान में

गेम्स की आयोजन समिति के चेयरमैन पीटर बिएटी ने कहा कि ये अब तक के सबसे क्लीन गेम्स होंगे।

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 10:15 AM IST
भारत 16 बार इसमें भाग ले चुका है। पर पिछले 3 गेम्स में अपने 50% मेडल जीते हैं। भारत 16 बार इसमें भाग ले चुका है। पर पिछले 3 गेम्स में अपने 50% मेडल जीते हैं।

गोल्ड कोस्ट. ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 4 अप्रैल से 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आगाज हो रहा है। इसमें भारत समेत कॉमनवेल्थ के 53 देशों की 71 टीमें हिस्सा ले रही हैं। भारत से भी 218 सदस्यीय दल हिस्सा ले रहा है। दुनियाभर में जितने भी मल्टी स्पोर्ट मल्टी नेशनल इवेंट होते हैं उसमें भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स में ही रहता है। कॉमनवेल्थ गेम्स में मानव आबादी वाले सभी महाद्वीपों के देश हिस्सा लेते हैं। ये धरती के 20% भूभाग और 33% आबादी की अगुआई करते हैं।

ये गेम्स कड़वाहट दूर करेंगे
- गोल्ड कोस्ट गेम्स की आयोजन समिति के चेयरमैन पीटर बिएटी ने शनिवार को कहा
कि क्रिकेटरों की गलत हरकत से दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया को अपमानित होना पड़ा है।
गेम्स यह कड़वाहट दूर करने में सफल होगा। ये अब तक के सबसे क्लीन गेम्स होंगे।
- भारत 16 बार इसमें भाग ले चुका है। पर पिछले 3 गेम्स में अपने 50% मेडल जीते हैं। इस बार 218 खिलाड़ियों का दल 17 खेलों में शामिल होगा।


अमेरिका नहीं तो भारत क्यों है कॉमनवेल्थ में?

- एक तबका कहता है कि अमेरिका कभी ब्रिटेन के अधीन था। पर कॉमनवेल्थ में नहीं है।
भारत को भी निकलना चाहिए। पर अमेरिकी आजादी के 173 साल बाद कॉमनवेल्थ बना।
- आजादी के वक्त भारत को खड़ा होने के लिए वैश्विक मदद की जरूरत थी। कॉमनवेल्थ इसमें मददगार साबित हुआ। भारत से पहले आजाद हुए देशों को एंट्री नहीं दी गई। आयरलैंड को कॉमनवेल्थ से हटना पड़ा था। पर भारत के लिए खास प्रावधान किए गए। बदले में भारत ने ब्रिटेन को हेड ऑफ कॉमनवेल्थ माना।

कॉमनवेल्थ में होने के दो बड़े फायदे
1. ब्रिटेन में 6 माह से ज्यादा रहने वाले भारतीयों को वहां वोट देने का अधिकार। ब्रिटिश नागरिक बनना जरूरी नहीं।
2. भारत का कोई नागरिक किसी ऐसे देश में है, जहां भारतीय दूतावास नहीं है, तो यूके के दूतावास से मदद ले सकता है।

2010 के आयोजन ने भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स की तस्वीर बदली
- कुछ साल पहले तक महत्व के लिहाज से ओलिंपिक के बाद एशियन गेम्स फिर कॉमनवेल्थ गेम्स का नंबर आता था। भारत ने पहली बार 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की। तब से यह लोकप्रियता के मामले में एशियन गेम्स से आगे निकल गया।
- 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स भले ही भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सुर्खियों में रहा, लेकिन भारत ने इसमें कुल 101 मेडल जीते और मेडल टेबल में दूसरा स्थान हासिल किया था। यह
अब तक का बेस्ट प्रदर्शन था।

6 देश ही सभी 20 कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल हुए हैं
- 6 देश ही ऐसे हैं जिन्होंने अब तक हुए सभी कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया है। ये हैं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स।
- जॉर्ज-5 की ताजपोशी के उपलक्ष्य में 1911 में फेस्टिवल ऑफ एंपायर का आयोजन किया गया था। कॉमनवेल्थ गेम्स का आइडिया वहीं से आया।
- 1.90 लाख किमी यात्रा करती है क्वींस बेटन रिले। यह दूरी धरती का 4.25 चक्कर लगाने के बराबर है।
- 1990 से 2002 के बीच नौरू के वेटलिफ्टर मार्कस स्टीफेन ने सात गोल्ड समेत 12 मेडल जीते। 2007 में वे नौरू के राष्ट्रपति बन गए।

क्या है कॉमनवेल्थ?
- कॉमनवेल्थ ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे देशों का इंटरगवर्न्मेंट ऑर्गेनाइजेशन है।
- 53 देश सदस्य हैं। 28 अप्रैल 1949 को लंदन डिक्लेरेशन के जरिए कॉमनवेल्थ का गठन किया गया।
- इसमें शामिल सभी देश फ्री एंड इक्वल माने गए। 53 देशों में सिर्फ मोजांबिक ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा नहीं रहा है।

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क्वींसलैंड में बसाया गया खेल गांव। क्वींसलैंड में बसाया गया खेल गांव।

3600 करोड़ रु. में बना है 29 हेक्टेयर का खेल गांव


- कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में खेल गांव बसाया गया है। 29 हेक्टेयर में बने खेल गांव में 12 दिन तक 6,600 एथलीट्स रुकेंगे। इसके लिए 1,170 वन या 2 बीएचके फ्लैट बनाए गए हैं। 
- 82 टाउनहाउस बने हैं। 36 सौ करोड़ रुपए की लागत से बने खेल गांव ने 1,500 लोगों को रोजगार भी दिया है। यहां 1 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं।
- रोज खेलगांव में 18 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही मेडिकल सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी। 
- 270 बेड वाला अस्पताल भी यहां है। क्वींसलैंड में कॉमनवेल्थ एक्सप्रेस भी चलाई गई है। स्पोर्टी लुक वाली ये ट्रेन अलग-अलग स्टेशनों से लोगों को लेकर कैरेरा स्टेडियम तक पहुंचाएगी। यहीं कॉमनवेल्थ इवेंट होने हैं। यह सेवा फ्री मुहैया की जाएगी।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें: कॉमनवेल्थ, ओलिंपिक के बाद सबसे बड़ा मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट...

ओलिंपिक और एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्पोट्‌र्स इवेंट है। ओलिंपिक और एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्पोट्‌र्स इवेंट है।

ओलिंपिक के बाद कॉमनवेल्थ इकलौता मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट है, जिसमें सभी 7 महाद्वीपों के देश खेलते हैं।


कॉमनवेल्थ ग्लासगो-2014 (53 देशों की 71 टीमें)

 

एथलीट 4947
खेल 18
इवेंट 261
खर्च 4968 करोड़ रु.
व्यूअरशिप 60 करोड़


 
 एशियन गेम्स इंचियोन-2014 (45 देश शामिल हुए)

 

एथलीट  9501
खेल 36
इवेंट 439
खर्च 10,538 करोड़ रु.
व्यूअरशिप 90 करोड़


ओलिंपिक रियो डि जनेरो-2016 (207 देश शामिल हुए)

 

एथलीट 11238
खेल 28
इवेंट 306
खर्च 30,000 करोड़ रु.
व्यूअरशिप 360 करोड़
 
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भारत 16 बार इसमें भाग ले चुका है। पर पिछले 3 गेम्स में अपने 50% मेडल जीते हैं।भारत 16 बार इसमें भाग ले चुका है। पर पिछले 3 गेम्स में अपने 50% मेडल जीते हैं।
क्वींसलैंड में बसाया गया खेल गांव।क्वींसलैंड में बसाया गया खेल गांव।
ओलिंपिक और एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्पोट्‌र्स इवेंट है।ओलिंपिक और एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्पोट्‌र्स इवेंट है।
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