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कॉमनवेल्थ गेम्स: पाकिस्तान ने अब तक जितने गोल्ड जीते, भारत हर गेम्स में उससे अधिक जीतता है

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 10:29 AM IST

आजादी के बाद पहली भागीदारी में पाकिस्तान से भी पीछे था भारत।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अपना पुहला गोल्ड मेडल 1958 में जीता था। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अपना पुहला गोल्ड मेडल 1958 में जीता था।

गोल्ड कोस्ट. कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में एक समय ऐसा था जब भारत की मेडल तालिका बिल्कुल खाली थी और पाकिस्तान ने इसमें एक गोल्ड सहित कुल 6 मेडल जीते थे। साल था 1954 यानी आजादी के बाद पहला काॅमनवेल्थ गेम्स। हालांकि, तब से अब तक के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पाकिस्तान ने कॉमनवेल्थ के अपने इतिहास में पदक जीते हैं, उतने भारत एक इवेंट में जीत लेता है। पाकिस्तान अब तक 12 गोल्ड समेत 64 मेडल्स जीत चुका है। जबकि भारत ने अकेले 2014 के ग्लासगो गेम्स में ही करीब इतने मेडल्स जीते थे। 21वीं सदी में भारत के प्रदर्शन में लगतार सुधार देखा गया है।


अब ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड जैसे देशों से है टक्कर
- कॉमनवेल्थ गेम्स में अब भारत की टक्कर पाकिस्तान या श्रीलंका से नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों से हैं। इसका प्रमाण है 1998 के कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद भारत का लगातार सुधरता प्रदर्शन। नई सदी में अब तक चार कॉमनवेल्थ हो चुके हैं। इनमें भारत ने 105 गोल्ड समेत 284 मेडल्स जीते हैं।
- इससे पहले यानी 1998 तक भारत ने 12 भागीदारियों में 50 गोल्ड सहित 154 मेडल्स जीते थे। 21वीं सदी में भारत के गोल्ड की संख्या में करीब 300% और कुल मेडल की संख्या में 150% इजाफा हुआ। ऐसी ग्रोथ 10 से ज्यादा मेडल जीतने वाले किसी और देश की नहीं रही है।
- 2010 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन भारत में हुआ था। देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी इसी दौरान सामने आया। 2010 में भारत मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा 39 गोल्ड जीतकर दूसरे स्थान पर रहा था। यहां तक की इंग्लैंड को भी पछाड़ दिया था।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का इतिहास
- 1934 में पहली बार भारत ने ब्रिटिश राज इंडिया के तौर पर गेम्स में हिस्सा लिया था। हालांकि तब कॉमनवेल्थ गेम्स का नाम भी ब्रिटिश एंपायर गेम्स था।
- भारत ने 1934 में ही पहला मेडल हासिल कर लिया था। तब भारत की ओर से कुश्ती में उतरे राशिद अनवर ने देश को कांस्य पदक दिलाया था।
- भारत को पहला गोल्ड मेडल आजादी के बाद 6वें कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला। 1958 में भारत को कुश्ती में लीला राम सांगवान ने सोना दिलाया।

388 दिन में 2.30 लाख किमी यात्रा करने के बाद गोल्ड कोस्ट पहुंचा क्वींस बेटन
- 388 दिन में 2.30 लाख किमी की यात्रा करने के बाद अब गोल्ड कोस्ट पहुंचा क्वींस बेटन कॉमनवेल्थ गेम्स का प्रतीक क्वींस बेटन गोल्ड कोस्ट पहुंच गया है। बेटन ने 388 दिनों में 2.30 लाख किमी की यात्रा की है। यह कॉमनवेल्थ में शामिल सभी 53 देशों से गुजरा है। वॉलेंटियर लिही गोल्ड कोस्ट की धरती पर बेटन को हाथ में लेने वाली पहली शख्स बनीं। ऑस्ट्रेलिया में 3800 लोग इस बेटन रिले का हिस्सा बन चुके हैं। बुधवार को बेटन की स्टेडियम में ग्रैंड एंट्री होगी।

भारत ने 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा 39 गोल्ड मेडल्स हासिल किए थे।      -फाइल भारत ने 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा 39 गोल्ड मेडल्स हासिल किए थे। -फाइल
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अपना पुहला गोल्ड मेडल 1958 में जीता था।कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अपना पुहला गोल्ड मेडल 1958 में जीता था।
भारत ने 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा 39 गोल्ड मेडल्स हासिल किए थे।      -फाइलभारत ने 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा 39 गोल्ड मेडल्स हासिल किए थे। -फाइल
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