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पैरेंट्स की मौत के बाद व्हीलचेयर टेनिस खेला, फिर खेल छोड़ा, अब बनी अकेली इंडियन पैरा साइक्लिंग

मधु जब 18 महीने की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था। उनका कमर से नीचे का हिस्सा दिव्यांग है।

Danik Bhaskar

Feb 08, 2018, 11:13 AM IST

स्पोर्ट्स डेस्क. इंडियन पैरा एथलीट मधु बागरी इन दिनों चर्चा में हैं। उनका सिलेक्शन म्यांमार में होने वाली एशियन पैरा साइक्लिंग चैम्पियनशिप के लिए भारत की टीम में हुआ है। वे इस चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने वाली भारत की सिंगल वुमन एथलीट हैं। ये चैम्पियनशिप 9 फरवरी से होगी। मधु की पर्सनल लाइफ काफी स्ट्रगलिंग रही है। डेढ़ साल की उम्र में हो गया था पोलियो...

- मधु जब 18 महीने की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था। उनका कमर से नीचे का हिस्सा दिव्यांग है।
- मधु के पिता अहमदाबाद में फ्लोर मिल में काम करते थे। उनकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया।
- कुछ महीनों बाद मधु की मां की भी मौत हो गई। इसके बाद उनके रिश्तेदारों ने मधु की मदद करने से इनकार कर दिया।
- माता-पिता की मौत के बाद रिश्तेदारों ने उनका साथ छोड़ दिया था। इसके बाद वे स्पोर्ट्स से जुड़ीं।

रिश्तेदारों ने नहीं दिया साथ तो लिया ये फैसला

- जब रिलेटिव्स ने मधु का साथ छोड़ा तो उन्होंने स्पोर्ट्स के जरिए खुद की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली जाकर व्हीलचेयर टेनिस खेलना शुरू किया।
- मधु ने 2013 से 2016 तक व्हीलचेयर टेनिस खेला। वे नेशनल चैम्पियन भी बनीं। टेनिस में उनका खर्च बढ़ता जा रहा था। लेकिन उन्हें सरकारी मदद नहीं मिलती थी।
- वे ट्यूशन पढ़ाने के बावजूद भी इस खेल का खर्च नहीं उठा पा रहीं थीं। इसलिए उन्होंने यह खेल छोड़ दिया।
- एक दिन उन्हें इंटरनेट से पैरालाइज्ड आर्मी जवानों की मदद करने वाली एक संस्था की जानकारी मिली। इस संस्था ने मधु को पैरा साइकल उपलब्ध कराई।
- इसी संस्था की मदद से मधु ने पैरा साइक्लिंग की ट्रेनिंग शुरू की। मधु बताती हैं, 'इस संस्था ने पहले उनका ट्रायल लिया। कुछ दिन ट्रेनिंग लेने के बाद तिरुमाला में उनसे 550 किमी साइक्लिंग कराई। इसके बाद मैंने कुछ पैरा साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। 2017 में नेशनल पैरा साइक्लिंग चैम्पियन बनी। अब पहली बार इतनी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही हूं। मुझे मेडल जीतने का पूरा भरोसा है।'

आगे की स्लाइड्स में देखें, मधु बागरी के फोटोज...

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