नई दिल्ली. इस वर्ल्ड कप का एक खिलाड़ी है, मोहम्मद नबी। उसके जैसा एक और है, दिनेश चंडीमल। और एक शहर है, न्यूजीलैंड का क्राइस्टचर्च। तीनों में काफी-कुछ एक सा है। वक्त ने तीनों की जड़ों पर चोट की थी। बर्बाद ही हो गए थे। लेकिन अब दुनिया के फलक पर चमकने वाले हैं। वर्ल्ड कप में पहली बार खेल रही अफगानिस्तान की टीम के मार्फत नबी विश्व क्रिकेट में पैर जमाने की काेशिश करेगा। और चंडीमल क्रिकेट में पहले से जमी हुई श्रीलंका की टीम में। क्राइस्टचर्च उद्घाटन मैच की मेजबानी करेगा।
आतंक ने बेघर कर दिया था, आज अफगानिस्तान की टीम का कप्तान
मोहम्मद नबी 1985 में जब पैदा हुआ, तो पूरा परिवार बेघर था। आतंक ने उसके परिवार को जड़ों से बेदखल कर शरणार्थी कैम्प में ला पटका था। पेशावर के इस कैम्प में बम-बंदूक की आवाजों के बीच नबी बड़ा हुआ। और 10 वर्ष की उम्र में पहली बार बल्ला थामा। बल्ला भी क्या, बल्ले जैसा कोई लकड़ी का टुकड़ा था। शरणार्थी कैम्पों की तंग गलियों में घंटों टेनिस बॉल से पसीना बहाया। जुनून ने असर दिखाया और 2009 में अंतरराष्ट्रीय कॅरियर शुरू हो गया। पहली बार स्कॉटलैंड के खिलाफ वनडे खेला। आज अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम का कप्तान है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर.....