खेल डेस्क. अन्य खेलों की तरह क्रिकेट की दुनिया में भी अंधविश्वास कोई नई बात नहीं है। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि खिलाड़ी कौन है। छोटा नाम है या बड़ा नाम, बॉलर है या बैट्समैन, यहां तक कि अंपायर भी इनमें शामिल हैं। कई दिग्गज अंधविश्वास के शिकार हैं।
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OMG सीरीज के तहत
Dainikbhaskar.com आपको ऐसे ही कुछ अंधविश्वास के बारे में बताने जा रहा है, जिन्हें क्रिकेटर्स कई मैचों में अपनाते थे। क्रिकेट में कई रिकॉर्ड्स बनाने वाले
सचिन तेंडुलकर हमेशा पहले बाएं पैर में पैड बांधते थे, तो जिमी यानी, मोहिंदर अमरनाथ फील्डिंग करते समय अपनी पैंट की जेब में लाल रूमाल रखते थे। वर्ल्ड कप के दौरान भी क्रिकेटर्स के अंधविश्वास देखने को मिलते रहे हैं। क्रिकेटर्स को लगता है कि अगर वे ऐसा करेंगे तो उनकी परफॉर्मेंश अच्छा रहेगा।
प्रशंसकों के भी हैं अंधविश्वास
मैच के दौरान दर्शक और प्रशंसक भी किसी टीम या खिलाड़ी के समर्थन में जाने-अनजाने अंधविश्वास की गिरफ्त में पाए जाते हैं। किसी एक सीट पर बैठकर या उसे बदलकर अपने प्रिय खिलाड़ी या टीम के लिए दुआ करना आसानी से देखा जा सकता है। ऐसी बातें कभी-कभी मजेदार घटना की गवाह भी बन जाती हैं।
संख्या जिन्हें मनहूस माना गया
11 नवंबर 2011 को ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था। सुबह के 11:11 बजे थे और द. अफ्रीका को जीत के लिए 111 रनों की जरूरत थी, तभी ज्यादातर दर्शकों और अंपायर इयान गोल्ड ने दूसरे अंपायर डेविड शेफर्ड को एक पैर पीछे की तरफ ऊपर उठाए हुए और उन्हें स्कोरबोर्ड पढ़ते देखा।
दिया 'नेल्सन नंबर' नाम
दरअसल, यह डेविड का अंधविश्वास था, जिसे बाद में 'नेल्सन' टर्म के नाम से जाना गया। इस शब्द की उत्पत्ति लॉर्ड नेल्सन (ब्रिटेन की रॉयल नेवी का अफसर) की कहावत से हुई थी, जो युद्ध के दौरान एक आंख, एक हाथ और एक पैर खो बैठा था और जिसे उसके प्रेरणादायक नेतृत्व और रणनीति की शानदार समझ के लिए जाना जाता था। बहरहाल, मैच के दौरान जब भी स्कोर 111 या इसके गुणांक 222 या 333 पर पहुंचा, अंपायर डेविड मैदान पर एक पैर उठाए देखे गए।
13 नंबर को ऑस्ट्रेलिया करते हैं नापसंद
संख्यात्मक अंधविश्वास की बात करें तो यह सभी जानते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी 13 नंबर को नापसंद करते हैं। इसी तरह 87 नंबर (100 से 13 कम) को भी वे अशुभ मानते हैं। इस अंधविश्वास को उस सच के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसे ज्यादातर लोग जानते हैं, इसके मुताबिक प्रभु यीशू मसीह के अंतिम भोजन के वक्त मेज के आसपास 13 लोग मौजूद थे। हालांकि 13 नंबर को मनहूस मानने की असली वजह पता करने के लिए अंधेरे में तीर मारने के सिवा और कोई तरीका नहीं है।
आगे स्लाइड्स में जानिए, कई क्रिकेटर्स के अलग-अलग अंधविश्वास जो वर्ल्ड कप के साथ-साथ कई मैचों में देखने को मिले...