इस पर्वत पर माना जाता है शिव का वास, चमत्कारिक रूप से बनता है ओम / इस पर्वत पर माना जाता है शिव का वास, चमत्कारिक रूप से बनता है ओम

प्रचलित मान्यताएं इसे चमत्कार बताती हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि शिव यहां विराजित हैं।

dainikbhaskar.com

Dec 26, 2016, 11:38 AM IST
ओम पर्वत का नाम यहां बनने वाली ओम की आकृति के कारण पड़ा है। ओम पर्वत का नाम यहां बनने वाली ओम की आकृति के कारण पड़ा है।
ट्रैवेल डेस्क. हिमालय के कुछ पर्वतों के बारे में ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि वहां कभी भगवान शिव का अस्तित्व रहा होगा। एक ऐसा ही पर्वत भारत और तिब्बत की सीमा पर आज भी मौजूद है जिस पर हर साल ओम की आकृति बनती है। जानिए कौनसा है ये पर्वत...
- इस पर्वत का नाम है ओम पर्वत। इसे आदि कैलाश के नाम से जाना जाता है।
- ओम पर्वत का नाम यहां बनने वाली ओम की आकृति के कारण पड़ा है।
- प्रचलित मान्यताएं इसे चमत्कार बताती हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि शिव यहां विराजित हैं।
कितनी ऊंचाई पर है ये पर्वत...
- ओम पर्वत की ऊंचाई समुद्र तक से 6,191 मीटर (20,312 ft) है।
- आदि कैलाश के अलावा ओम पर्वत को लिटिल कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग के नाम से भी जाना जाता है।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिमालय पर कुल 8 प्राकृतिक ओम की आकृतियां बनी हुई हैं। इनमें से अबतक केवल ओम पर्वत की ही आकृति के बारे में पता चल सका है।
कैलाश मानसरोवर का महत्व...

कैलाश मानसरोवर को शिव-पार्वती का घर माना जाता है। सदियों से देवता, दानव, योगी, मुनि और सिद्ध महात्मा यहां तपस्या करते आए हैं। मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति मानसरोवर (झील) की धरती को छू लेता है, वह ब्रह्मा के बनाये स्वर्ग में पहुंच जाता है और जो व्यक्ति झील का पानी पी लेता है, उसे भगवान शिव के बनाये स्वर्ग में जाने का अधिकार मिल जाता है।
आगे की स्लाइड्स में जानिए कैसे पहुंचे ओम पर्वत साथ ही जाएं यहां से जुड़ी दिलचस्प बातें...
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ऐसा होगा ट्रैकिंग प्रोग्राम  
 
Day 01:- सुबह काठगोदाम से चौकोरी तक पहुंचे(होटल में चैक इन करें) 
Day 02:- ब्रेकफ़ास्ट के बाद दार्चुला पहुंचे 
Day 03:- मंगती तक ड्राइव कर पहुंचे फिर गाला तक ट्रैक करें 
Day 04:- बुंदी तक ट्रैक 
Day 05:- गूंगी तक ट्रैक 
 
आगे की स्लाइड्स में देखें बाकी दिनों का ट्रैकिंग प्रोग्राम... 
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Day 06:- ओम पर्वत तक जाने के लिए नवीढंग से ट्रैक करें 
Day 07:- कालापानी तक करें (काली मंदिर तक)
Day 08:- गुंगी तक ट्रैक करें 
Day 09:- कुट्टी तक ट्रैक 
Day 10:- आदि कैलाश के लिए जोलिंगकोंग तक ट्रैक 
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Day11:- आदि कैलाश के दर्शन के बाद पार्वती सरोवर के दर्शन 
Day 12:- वापस कुट्टी तक ट्रैक 
Day 13:- गुंगी तक ट्रैक 
Day 14:- बुंदी तक ट्रैक 
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Day 15:- मंगती तक ट्रैक करें फिर दार्चुला तक जाएं  
Day 16:- चुकोरी तक ड्राइव (होटल में चैक इन) 
Day 17:- ब्रेक फ़ास्ट कर काठगोदाम पहुंचे 
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ओम पर्वत का नाम यहां बनने वाली ओम की आकृति के कारण पड़ा है।ओम पर्वत का नाम यहां बनने वाली ओम की आकृति के कारण पड़ा है।
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