ये हैं अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी, पानी के लिए ऐसे करती हैं मेहनत / ये हैं अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी, पानी के लिए ऐसे करती हैं मेहनत

DainikBhaskar.com

Dec 25, 2017, 10:28 AM IST

यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। यहां आज भी उनकी फैमिली के लोग रहते हैं।

यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। यहां उनकी फैमिली के लोग रहते हैं। यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। यहां उनकी फैमिली के लोग रहते हैं।

आगरा. 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बर्थडे है। यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। ये गांव आज भी बुनियादी समस्‍याओं से जूझ रहा है। यहां आज भी उनकी फैमिली के लोग रहते हैं। dainikbhaskar.com आपको अटल के गांव और उनके फैमिली मैंबर्स से रूबरू कराने जा रहा है।

स्ट्रगलिंग लाइफ जीती हैं भतीजी

 

- अटल बिहारी के भतीजे (69 साल) रमेश चंद्र वाजपेयी ने बताया, ''मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, इसलिए पत्नी को ही पूरा काम देखना होता है। आस-पास के 6 घरों के लिए एक हैंडपंप लगा हुआ है। पत्नी को काफी दूर से पानी भरकर लाना होता है।''
- उन्होंने बताया, ''अटल जी जब से बीमार हुए हैं, तब से गांव के विकास के बारे में कोई पूछने भी नहीं आता। रोजाना 16 घंटे से ज्‍यादा बिजली कटौती होती है।''

 

2003 में आखिरी बार अटल जी गए थे अपने गांव

 

- ''बटेश्‍वर गांव के वाजपेयी मोहल्‍ले में 90 के दशक तक रौनक रहती थी। यहीं से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति शुरू की थी।''
- ''अब वाजपेयी मोहल्‍ला उजड़ चुका है। अटल जी का घर खंडहर बन चुका है। इनके घर के आस-पास पांच मकान और परिवार मौजूद हैं।''
- ''अच्‍छा भविष्‍य बनाने के लिए वाजपेयी मोहल्‍ले का परिवार शहरों में चला गया। ज्‍यादातर लोग तो कभी लौटकर नहीं आए।''
- ''आखिरी बार अटल जी यहां साल 2003 में आए थे। उस समय उन्‍होंने रेल लाइन का शिलान्‍यास किया था।''

- ''2015 में अटल के बर्थडे के एक दिन पहले भी ही यहां ट्रेन की शुरुआत हुई।''

 

कुछ ऐसा है अटल जी के गांव का इतिहास

 

- बटेश्वर को तीर्थस्थल नहीं, बल्कि तीर्थराज कहा जाता है। वह इसलिए, क्योंकि यहां आस्था के केंद्र 101 शिव मंदिर हैं।
- मंदिर के घाटों को छूती यमुना यहां विपरीत दिशा में बहती हैं।
- पानीपत के तीसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए हजारों मराठों की स्मृति में मराठा सरदार नारू शंकर ने बटेश्वर में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी है।

 

ऐसी स्ट्रगलिंग लाइफ जीती हैं अटल की भतीजी। ऐसी स्ट्रगलिंग लाइफ जीती हैं अटल की भतीजी।
अटल के भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी ने बताया- मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, इसलिए पत्नी को ही सारा काम देखना होता है।अटल जी का घर खंडहर बन चुका है। अटल के भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी ने बताया- मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, इसलिए पत्नी को ही सारा काम देखना होता है।अटल जी का घर खंडहर बन चुका है।
बटेश्वर को तीर्थस्थल नहीं, बल्कि तीर्थराज कहा जाता है। वह इसलिए, क्योंकि यहां आस्था के केंद्र 101 शिव मंदिर हैं। बटेश्वर को तीर्थस्थल नहीं, बल्कि तीर्थराज कहा जाता है। वह इसलिए, क्योंकि यहां आस्था के केंद्र 101 शिव मंदिर हैं।
पानीपत के तीसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए हजारों मराठों की स्मृति में मराठा सरदार नारू शंकर ने बटेश्वर में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी है। पानीपत के तीसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए हजारों मराठों की स्मृति में मराठा सरदार नारू शंकर ने बटेश्वर में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी है।
मंदिर के घाटों को छूती यमुना यहां विपरीत दिशा में बहती हैं। मंदिर के घाटों को छूती यमुना यहां विपरीत दिशा में बहती हैं।
X
यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। यहां उनकी फैमिली के लोग रहते हैं।यूपी के बीहड़ में स्थित बटेश्‍वर अटल का पैतृक गांव है। यहां उनकी फैमिली के लोग रहते हैं।
ऐसी स्ट्रगलिंग लाइफ जीती हैं अटल की भतीजी।ऐसी स्ट्रगलिंग लाइफ जीती हैं अटल की भतीजी।
अटल के भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी ने बताया- मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, इसलिए पत्नी को ही सारा काम देखना होता है।अटल जी का घर खंडहर बन चुका है।अटल के भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी ने बताया- मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है, इसलिए पत्नी को ही सारा काम देखना होता है।अटल जी का घर खंडहर बन चुका है।
बटेश्वर को तीर्थस्थल नहीं, बल्कि तीर्थराज कहा जाता है। वह इसलिए, क्योंकि यहां आस्था के केंद्र 101 शिव मंदिर हैं।बटेश्वर को तीर्थस्थल नहीं, बल्कि तीर्थराज कहा जाता है। वह इसलिए, क्योंकि यहां आस्था के केंद्र 101 शिव मंदिर हैं।
पानीपत के तीसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए हजारों मराठों की स्मृति में मराठा सरदार नारू शंकर ने बटेश्वर में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी है।पानीपत के तीसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए हजारों मराठों की स्मृति में मराठा सरदार नारू शंकर ने बटेश्वर में एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी है।
मंदिर के घाटों को छूती यमुना यहां विपरीत दिशा में बहती हैं।मंदिर के घाटों को छूती यमुना यहां विपरीत दिशा में बहती हैं।
COMMENT

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543