नई दिल्ली/ आगरा: यूपी के आगरा में 200 से ज्यादा मुस्लिमों के कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन करवाए जाने का मामला बुधवार को संसद में भी उठा। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही जगह विपक्ष के सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधा। बता दें कि आरएसएस से जुड़े बजरंग दल और एक अन्य संगठन की ओर से सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में 60 मुस्लिम परिवार के सदस्यों का धर्म परिवर्तन करवाया गया। हिंदू संगठनों ने इस 'घर वापसी' का कार्यक्रम बताया, जबकि प्रभावित परिवार के दो सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें राशन कार्ड और आधार कार्ड का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया गया। उधर, आरएसएस से जुड़े धर्म जागरण मंच के उत्तर प्रदेश प्रमुख ने एलान किया है कि 25 दिसंबर को 15 हजार लोगों का धर्म परिवर्तन करा कर उन्हें हिंदू बनाया जाएगा।
सदन ने मांगा पीएम से जवाब
तृणमूल नेता सुल्तान अहमद ने यह मामला लोकसभा में उठाया। उन्होंने अखबार लहराते हुए पूछा कि आगरा में क्या हो रहा है? वहीं, बीजेपी सुप्रीमो ने राज्यसभा में कहा कि यह मामला देश की सेक्युलर व्यवस्था पर हमला है। मायावती ने कहा, ''हमारा देश संविधान से चलता है और धर्म निरपेक्षता इसका एक स्तंभ है।'' मायावती ने आरोप लगाया कि बजरंग दल ने धर्म परिवर्तन कराने वाले परिवारों की गरीबी का फायदा उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह सब रोका नहीं गया तो पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव फैल जाएगा। वहीं, कांग्रेस के आनंद शर्मा ने राज्यसभा में कहा कि सदन और देश को यह विश्वस्त करने की जरूरत है कि संविधान का उल्लंघन नहीं होगा। लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि पीएम को इस मामले पर सफाई देनी चाहिए।
बचाव में बीजेपी
संसदीय मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार धर्मनिरपेक्षता के प्रति कटिबद्ध है और यह किसी एक पार्टी की जागीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए किसी एक संगठन का नाम लेना सही नहीं है। उन्होंने सदन से अपील की कि संगठन खासतौर पर आरएसएस का नाम सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। मुख्तार के मुताबिक, इस मामले में जो कुछ करना है, वह राज्य सरकार को करना है।
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