आगरा

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सिकंदर ने इस हथियार से की थी दुनिया फतह, अब अखिलेश ने की देसी वर्जन की शुरुआत

आगरा के एकलव्‍य स्‍टेडियम में इस हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2016, 01:38 PM IST
अखि‍लेश यादव ने की देसी क्रॉसबो की शुरुआत। अखि‍लेश यादव ने की देसी क्रॉसबो की शुरुआत।
आगरा. सिकंदर ने जिस हथियार से 2,337 साल पहले दुनिया में अपनी वीरता का परचम लहराया था, उसके देसी वर्जन की शुरुआत अखिलेश यादव ने गुरुवार को की। यह हथियार क्रॉसबो है। आगरा के एकलव्‍य स्‍टेडियम में इस हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं। ताजमहल के साथ-साथ क्रॉसबो से भी पहचान मिलनी चाहिए। सीएम ने कहा- साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें...

- सीएम अखिलेश ने कहा कि आगरा को ताजमहल के साथ-साथ क्रॉसबो से भी पहचान मिलनी चाहिए।
- यहां पर लगातार इंटरनेशनल शूटिंग चैम्‍पियनशिप हो रही है।
- मैंने फि‍ल्‍म तूफान में क्रॉसबो को देखा था। पार्टी कार्यकर्ताओं से भी कहा कि आगरा के साथी साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें।
सिकंदर ने बनाया था यह हथि‍यार
- क्रॉसबो शूटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष रजत बिज बताते हैं कि भारत पर आक्रमण के दौरान सिकंदर को भारतीय तिरंदाज से कड़ा मुकाबला मिला था।
- तब सिकंदर ने अपनी सेना को ऐसा तीर-कमान बनाने का आदेश दिया, जो दूर तक भेद सके।
- दो सिपाहियों ने ऐसी कोशिश की। उसने बड़े बांस के टुकड़े की पंखुडि़यां बनाकर हुक लगा दिया। रस्‍सी बांधी और क्रॉसबो का पहला वर्जन तैयार हो गया।
- इसके तीर सामान्‍य के मुकाबले तीन गुने ज्‍यादा दूर जाकर गिरते थे। इसे बैलगाड़ी पर रखकर चलाया जाता था। तीन लोग इसे चलाते थे।
- सिकंदर ने इस क्रॉसबो को खेल के रूप में भी अपनाया। तब से अब तक क्रॉसबो का रूप काफी बदला और दुनिया भर के विकसित देशों का पसंदीदा खेल बन गया
है।
2,337 साल बाद लगा खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा
- भारत में इस गेम को कुछ चुनिंदा शौकीन खिलाड़ी ही इससे निशानेबाजी करते थे। अब 2,337 साल बाद फिर से इसके खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा हुआ।
- पिछले कुछ साल से राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस खेल को शुरू किया गया। क्रॉसबो शूटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया को वर्ल्‍ड क्रॉसबो शूटिंग ऐसोसिएशन की मान्‍यता भी
मिल गई है।
- इस बार गुरुवार को आगरा में क्रॉस्‍बो शूटिंग चैम्‍पियनशिप आगरा के एकलव्‍य स्‍टेडियम में शुरू हो रहा है।
- इस चैम्‍पियनशिप में पुर्तगाल, स्‍वीडन, जापान, अमेरिका, और भारत के 20 निशानेबाज हिस्‍सा ले रहे हैं।
- क्रॉसबो शूटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष रजत बिज ने बताया कि महान सिकंदर के प्रिय खेल के लिए अब आगरा, गाजियाबाद, देहरादून और गुड़गांव
में शूटिंग रेंज बनाया गया है।
- बिज ने बताया कि यह खेल सस्‍ता है। इसके लिए टार्गेट, क्रॉसबो और तीर की जरूरत पड़ती है। यह दस हजार से लेकर पांच लाख तक में मिलता है।
आगे की स्‍लाइड्स में देखि‍ए फोटोज...
अखि‍लेश ने कहा कि साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें। अखि‍लेश ने कहा कि साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें।
हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं। हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं।
2,337 साल बाद लगा खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा। 2,337 साल बाद लगा खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा।
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अखि‍लेश यादव ने की देसी क्रॉसबो की शुरुआत।अखि‍लेश यादव ने की देसी क्रॉसबो की शुरुआत।
अखि‍लेश ने कहा कि साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें।अखि‍लेश ने कहा कि साइकिल से ज्यादा क्रॉसबो को पहचान दें।
हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं।हथियार को चलाने के लिए देश-दुनिया के 20 शूटर पहुंचे हैं।
2,337 साल बाद लगा खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा।2,337 साल बाद लगा खिलाड़ि‍यों का जमावड़ा।
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