फोटो: आगरा के नूरी दरवाजा इलाके में भगत सिंह का आशियाना।
आगरा. शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 27 सितंबर को जयंती थी। आगरा के नूरी दरवाजा इलाके में कभी इस आजादी के दीवाने का आशियाना था। कहा जाता है कि इस किराए के मकान में भगत सिंह ने अपनी जिंदगी के कुछ दिन बिताए थे। यहीं पर उन्होंने अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर असेंबली बम ब्लास्ट की योजना बनाई थी। देखरेख नहीं होने से उनका घर बदहाल है। स्थानीय प्रशासन के साथ राज्य सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
भगत सिंह की जयंती के मौके पर शहर की एक नाटक मंडली शनिवार को सुबह-सुबह उनके घर पहुंचा। यहां सड़क पर जगह-जगह सीवर का फैला था। कुछ देर बाद एक संस्था से जुड़े कुछ पदाधिकारी भी वहां पहुंचे। उन्होंने शहीद-ए-आजम की प्रतिमा पर माला चढ़ाई और चलते बने। उनका भी ध्यान मकान की बदहाली पर नहीं गया। आसपास के लोगों ने बताया कि सरकार हर साल 23 मार्च और 27 सितंबर को चौराहे पर लगी भगत सिंह की प्रतिमा की सुध लेती है। इसी दिन मूर्ति की साफ-सफाई की जाती है। बाकी दिन प्रतिमा पर लगे धूल को पोछने के लिए कोई नहीं आता।
नुक्कड़ नाटक से दिया मैसेज
इस दौरान भारतीय नाट्य संघ आगरा के कलाकारों ने एक नुक्कड़ नाटक भी पेश किया। इसकी कहानी मशहूर रंगकर्मी राजेंद्र रघुवंशी द्वारा लिखी गई थी। कलाकारों ने इसके जरिए लोगों को संदेश देने की कोशिश की गई। इसके अलावा डॉ. नाटिका 'सुनो-सुनो' का भी मंचन किया गया।
कब हुआ जन्म
बताते चलें कि सरदार भगत सिंह का नाम अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है। उनका जन्म 27 सितंबर 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव (जो अभी पाकिस्तान में है) के एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और मां का नाम विद्यावती कौर था।
देश के लिए दे दी कुर्बानी
साल 1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें
विवाह बंधन में बांधने की तैयारियां होने लगी, तो वह लाहौर से भागकर कानपुर आ गए। फिर देश की आजादी के संघर्ष में ऐसे रमें कि पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया। भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा।
आगे देखिए, शहीद-ए-आजम भगत सिंह की मूर्ति पर माला चढ़ाते लोगों की तस्वीर...