आगरा. चंबल के बीहड़ में एक ऐसी गुफा है, जहां खुंखार डकैतों का सिर झुक जाया करता था। वे यहां विश्राम करते थे। बिना किसी डर के। सौ साल से अधिक पुरानी गुफा का राज धीरे-धीरे दफन होता जा रहा है। इस गुफा को नेपाली तपोभूमि के नाम से जाना जाता था। बाबा नेपाली ने तपस्या करने के लिए यह गुफा बनाई थी। गुफा मिट्टी के टीले के नीचे थी। चंबल में डकौतों का राज खत्म होने के साथ ही इस गुफा का भी निशान मिटता जा रहा है।
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