आगरा. जीआरपी और सीबीसीआईडी का इंस्पेक्टर बनकर लोगों को ठगने वाला शातिर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी से पहले वह पंजाब मेल ट्रेन में इंस्पेक्टर की वर्दी में यात्रियों और वेंडरों से अवैध वसूली कर रहा था। इसी दौरान जीआरपी को शक हुआ और उसने उसे गिरफ्तार कर लिया। आगे पढ़िए, कैसे गिरफ्तार हुआ फर्जी इंस्पेक्टर...
गुरुवार को आगरा स्टेशन पर जीआरपी की टीम पंजाब मेल में चढ़ी तो एक वेंडर ने बताया कि कोच में मौजूद एक इंस्पेक्टर ने 50 रुपए रिश्वत लिए हैं। इसके बाद जीआरपी की टीम उस इंस्पेक्टर के पास पहुंची। फर्जी इंस्पेक्टर ने खुद का नाम नरेश चंद्र बताया और अपना फर्जी कार्ड दिखाया। उसने आरोपी ने खुद को सीआईए आगरा का प्रभारी बताया।
जीआरपी टीम को फटकारा
आरोपी ने जीआरपी की टीम को फटकारते हुए कहा कि ट्रेन में आपराधिक घटनाएं लगातार हो रही है और टीम सतर्क नहीं है। जीआरपी की टीम ने इस फर्जी इंस्पेक्टर को बातों में उझाए रखा। इसके बाद राजामंडी स्टेशन आया और उसे यहां पर थाने में ले जाया गया। इसके बाद जीआरपी ने सख्ती दिखाई तो फर्जी इंस्पेक्टर नरेंश चंद्र ने अपना कार्ड दिखाया इसमें पर्सनल नोमिनेशन नंबर दस अंकों में था। जबकि, यह नंबर नौ अंकों का ही होता है।
यूपी पुलिस के फर्जी पहचान पत्र
फर्जी इंस्पेक्टर के पास यूपी पुलिस के फर्जी पहचान पत्र, दो मोबाइल और दो सिम मिले। पहचान पत्र पर एसपी जीआरपी आगरा की मुहर लगी हुई हुई थी। एसपी रेलवे गोपेश खन्ना ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह कभी सीबीसीआईडी तो कभी जीआरपी का इंस्पेक्टर बनकर लोगों को ठगता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी नरेशचंन्द्र इटावा में सरकारी कॉलेज में प्रिंसिपल था। तीन महीने पहले यहां रुपयों के घपले में उसे सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद से वह फर्जी इंस्पेक्टर बनकर लोगों को ठग रहा था।