आगरा. सेंट्रल जेल में 10 लाख रुपये पड़े हैं, लेकिन इन्हें लेने को कोई तैयार नहीं है। यह रकम कैदियों की कमाई का एक हिस्सा, जो निमानुसार पीड़ित परिवार को देना होता है। जिनकी उंगलियों ने कभी खून बहाकर उनके घरों के चिराग बुझाए थे, सजा काटते उन्हीं हाथों की कमाई को वे अपनाना नहीं चाहते हैं।
सेंट्रल जेल में इस वक्त 1800 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे कैदी हैं, जो खूनी संघर्ष या हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। इनमें से 400 कैदी जेल के अंदर फर्नीचर, फिनायल, पेठा कारखाना समेत कई तरह के काम कर रहे हैं।
इनकी तीन श्रेणियों में कुशल कारीगर को 40, अर्धकुशल को 30 और अकुशल को 25 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक मिलता है। नियमानुसार कमाई का 15 प्रतिशत हिस्सा इन कैदियों को पीड़ित परिवार को देना होता है। यह सारी रकम पीड़ितों के प्रतिकर के नाम से बने खाते में जाम होती है। सेंट्रल जेल में इस खाते में अब तक दस लाख से अधिक रुपए जमा हो चुके हैं।
इन कैदियों के शिकार दर्जनों पीडि़त परिवारों को चिह्नित किया गया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन परिवारों को उनके हिस्से की राशि लेने का प्रस्ताव दिया गया। इसकी जेल प्रशासन की ओर से सूचना भेजी गई।
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