आगरा. ताजमहल के कारीगरों का खानदान अब सबसे पवित्र जगह मक्का के हरम शरीफ के लिए पच्चीकारी कर रहे हैं। दुनिया की अजूबी इमारत की तरह ही पवित्र कुरान की आयतें मक्का में दिखाई देंगी। फर्क होगा कि ताजमहल में राजस्थान के संगमरमर का इस्तेमाल किया गया था, और हरम शरीफ में ऑस्ट्रेलियन सफेद संगमरमर का। संगमरमर पर आयतों के पैनल आगरा में तैयार कराए जा रहे हैं। इस काम का जिम्मा सऊदी अरब सरकार ने आगरा के शिल्पी इकबाल अहमद को सौंपा है। अब तक 24 पैनल तैयारकर जयपुर में सोने की कोटिंग के बाद अरब भेजे जा चुके हैं।
इस बार हज करने जाने वाले लोग मक्का के हरम शरीफ में ताजमहल की तरह संगमरमर की पच्चीकारी दिख सकेंगे। पूरी तैयारी उसी के अनुरूप चल रही है। कुल 160 पैनल तैयार करने के लिए 50 कारीगर दिनरात लगे हुए हैं। ताजमहल की तरह संगमरमर पर आगरा की पच्चीकारी ककला दुनिया में अपना लोहा मनवा रही है। खास बात है कि ऑस्ट्रेलियन सफेद संगमरमर का पैनल पर यह डिजाइन हो रही है। इसमें अफगानिस्तान के नीले लैपिसलैजूरी (लाजवर्त) पत्थर से कुरान के हरुफ बनाए जा रहे हैं।
पैनल में सूर-ए-मुल्क, सूर-ए-नाजियत और आयतल कुरसी लिखी जा रही है। इसमें 5 मिलीमीटर का उभार देकर आयतों को लिखा जा रहा है। इसके ऊपर जयपुर में सोने की कोटिंग करवाई जा रही है। हाजी इकबाल अहमद ने बताया कि अरबी के कागजों पर लिखी आयतें ‘खाके’ तुर्की से आई हैं। इन्हें पत्थरों पर उकेरा जा रहा है। खास तौर से मुफ्ती मो. आसिफ काजमी हर दिन पैनलों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह के घर में उनकी कला पहुंचे। यह गौरव की बात है। उनका खानदान ताजमहल के निर्माण से जुड़ा रहा है।