फोटो: अपने परिजनों से मिलते नितिन (दाएं) और शिल्पी (बाएं)।
आगरा, केदार नगर निवासी एक नव
विवाहित जोड़ा शादी के अगले ही दिन हनीमून के लिए
कश्मीर गया था। उन्होंने वहां वैष्णो देवी के दर्शन किए। श्रीनगर लौटने के वक्त बाढ़ में फंस गए। एक हफ्ते तक उन्होंने बाढ़ की त्रासदी झेली। इस दौरान उनका अपनों से संपर्क टूट गया। कोई मदद नहीं मिलने पर कई किमी जंगल पार कर वे किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से दिल्ली आए और रेल मार्ग से रविवार को आगरा पहुंचे। ऐसे में जब उन्होंने परिजनों के देखा, तो उनके आंसू छलक पड़े। दोनों ने बाढ़ का खौफनाक मंजर बयां किया।
केदार नगर निवासी नितिन कक्कड़ और उनकी पत्नी शिल्पी शादी 30 अगस्त को हुई थी। एक सितंबर को यह दोनों हनीमून मनाने जम्मू-कश्मीर रवाना हो गए। दो सितंबर को उन्होंने वैष्णो देवी का दर्शन किया और अगले दिन श्रीनगर आ गए। उन्होंने डल झील में हाउस बोटिंग किराए पर लिया और दो दिन इसमें रुके। इसके बाद वह एक होटल में चले गए। सात सितंबर से हल्की बारिश होने लगी। उसके बाद वहां के हालात बिगड़ते गए। इसी रात होटल स्टाफ ने होटल खाली करने को कहा। हनीमून कपल को छत से होकर पहाड़ी के रास्ते बाहर निकाला गया।
पहाड़ी से हेलिकॉप्टर को रूकने के लिए करते थे इशारे
यहां से वे श्रीनगर के मकदुम साहब की दरगाह पर चले गए। यहां पर किसी तरह दो दिन बिताए। लोगों की भीड़ भी बढ़ने लगी। कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। वे सिर्फ स्थानीय लोगों को ही वहां पर रुकने दे रहे थे। ऐसे में उन्हें 9 सितंबर को यहां से निकलना पड़ा। नितिन कक्कड़ बताते हैं कि वे हर दिन सुबह सात बजे उठते ही पहाड़ी पर चले जाते थे। उन्हें आसमान में हेलिकॉप्टर उड़ता दिखता था। नितिन और उसकी पत्नी लाल कपड़ा लहराकर खुद के होने का एहसास कराते थे, लेकिन तीन दिनों तक हेलिकॉप्टर नहीं आया। वे रोज सुबह पहाड़ी पर जाते और शाम को निराश होकर लौट आते थे।
स्थानीय लोगों ने किया पथराव
12 सितंबर को सेना का एक हेलिकॉप्टर ने उतरने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों ने पथराव कर दिया। इससे हेलिकॉप्टर नीचे नहीं उतर सका। श्रीनगर के कई स्थानीय लोग नहीं चाहते थे कि सेना की कोई भी मदद किसी को मिले। इनमें से कई लोग हेलिकॉप्टर से खाने-पीने का गिराया हुआ पैकेट भी फाड़कर पानी में बहा रहे थे। ऐसा ही एक पैकेट हनीमून कपल के हाथ लग गया। इसमें
मोबाइल की बैटरी थी। इसके बाद उन्होंने आगरा में परिवार से बातचीत की। इसके बाद वे पैदल ही एयरपोर्ट की ओर निकल गए और गुरुद्वारा आ गए।
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