शाहजहां ने नहीं कटवाए थे मजदूरों के हाथ, जानिए क्‍या है ताज की हकीकत

7 वर्ष पहले
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आगरा. ताज महल में हुए 3 से 5 मई तक शाहजहां के उर्स में काफी लोगों की भीड़ पहुंची। इस दौरान लोगों को शाहजहां और मुमताज की असली कब्र देखने को मिली। ऐसे में हम आज ताज के निर्माण से जुड़ी कुछ सच्‍चाईयों से पर्दा उठाने जा रहे हैं।


नहीं कटवाए गए थे ताज बनाने वालों के ह‍ाथ
- ऐसी अफवाह है कि शाहजहां ने ताज बनाने वाले 20 हजार मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे।
- इसके पीछे वजह बताई जाती है कि शाहजहां चाहता था कि दोबरा कोई ताज जैसी स्‍मारक न बनवा सके।
- लेकिन इतिहासकार राजकिशोर के अनुसार, शाहजहां ने ताज के निर्माण के बाद कारीगरोंं से आजीवन काम न करने का वादा लिया था।
- इसके बदले कारीगरों को जिंदगी भर वेतन देने का वादा किया गया था।
- कारीगरों के हाथों के हुनर का काम करने से रोक देने को दूसरे शब्‍दों में हाथ काटना कहा गया।
- शाहजहां ने ताज के पास 400 साले पहले मजदूरों के लिए ताजगंज नाम से बस्‍ती बसा दी थी।
- ताज निर्माण के समय मजदूर और आर्किटेक्‍ट यहीं रहा करते थे।
- इनमें से कुछ मजदूरों और आ‍र्केटिक्‍ट को ताज के साथ-साथ दिल्‍ली के लाल किला निर्माण में भी लगाया गया था।
- अब भी यहां उन मजदूरों के वंशज यहां रह रहे हैं। यहां के निवासी ताहिर उद्दीन ताहिर का कहना है कि उन्‍हें गर्व है कि उनके पूर्वजों ने ताजमहल बनाने में हिस्‍सा लिया।
- हाथ काटने की अफवाह में जरा भी सच्‍चाई नहीं है।

ताज का नक्‍शा बनाने वाले को मिलती थी 1 हजार रु सैलरी
- शाहजहां को इमारतें बनवाने का शौक था। ताज पहली इमारत थी, जिसका निर्माण उन्‍होंने कराया।
- दूरदराज से तमाम बेहतरीन कारीगर पैसों के लालच में आगरा में आकर बस गए थे।
- भारत ही नहीं अरब पर्सिया और तुर्की से वास्‍तुविदों, मिर्ताणकर्ताओं और पच्‍चीकारी के कलाकारों को बुलाया गया था।
- ताज का नक्‍शा बहुतों ने बनाया, लेकिन शाहजहां को उस्‍ताद ईसा आफदी का डिजाइन पसंद आया।
- जबकि पत्‍थरों पर शब्‍द उकेरने का काम अमानत खान शिरजी को सौंपा गया।
- शाहजहां इन दोनों को काम के बदले 1 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी देता था, जोकि उस समय बहुत ज्‍यादा थी।
- आफदी के साथ चार अन्‍य लोगों को नक्‍शे के काम के लिए समान वेतन पर रखा गया था।

तुर्की के कारीगर ने बनाया था ताज का गुंबद
- तुर्की के कारीगर इस्माइल खान को ताज का गुंबद बनाने की जिम्‍मेदारी मिली थी।
- इसके लिए उन्हें 500 रुपए प्रति महीने सैलरी मिलती थी।
- वहीं, 200 रुपए महीने पर लाहौर के कासिम खान ने कलश बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
- मनोहर लाल मन्नू को 500 रुपए प्रति महीने में पच्चीकारी का काम सौंपा गया था।
- गुम्बद तैयार करने की जिम्मेदारी तुर्की के कारीगर इस्माइल खान को मिली और इसके लिए उन्हें 500 रुपये महीना पर रखा गया।
- 200 रुपए महीने पर लाहौर अब पकिस्तान के कासिम खान ने कलश बनाने की जिम्मेदारी संभाली।
- मनोहर लाल मन्नू लाल मोहन लाल को 500 रुपये माह में पच्ची कारी का काम सौपा गया।


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