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ताज की ये खूबसूरती इस लैंप से आज भी है बरकार, देखिए तस्वीरें

8 वर्ष पहले
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आगरा. ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की कब्र के ठीक ऊपर खूबसूरत लैंप दिखता है। यह लैंप मिस्र के सुल्‍तान बेवर्सी दि्तीय की मस्जिद की नकल है। इसे तैयार करवाने में 108 साल पहले 15 हजार रुपए खर्च हुए थे। इससे पहले यहां धुएं वाला लैंप जलता था। इससे पूरे मकबरे में धुंआ फैला रहता था।
दरअसल, तत्‍कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन जब 18 अप्रैल 1902 को आगरा आए थे। उस वक्‍त जब वह मकबरे में गए तो वहां धुंए से उन्‍हें परेशानी हुई। इसके बाद अगले साल वह फिर आए और दोबारा यह परेशानी महसूस हुई।
इतिहासकार राजकिशोर राजे ने बताया कि कर्जन ने बेहतरीन बिना धुएं वाला खूबसूरत लैंप तलाश करने का आदेश दिया, लेकिन भारत में अंग्रेजों को कोई बेहतरीन कारीगर नहीं मिला। इसके बाद उसने मिस्र में तैनातान अपने मित्र लार्ड क्रोमर को लिखा। वहां सुल्‍तान बेवार्सी दि्तीय की मस्जिद का लैंप ताजमहल के लिए कर्जन को ठीक लगा।
आगे जाने कैसे लॉर्ड कर्जन से ताजमहल की खूबसूरती को बचाया...