आगरा. दि्वतीय विश्व युद्ध के दौरान दुनिया में सातवां अजूबा ‘ताजमहल’ के विध्वंस का खतरा पैदा हो गया था। उस वक्त ब्रिटेन ने अमेरिकी सेना के सहयोग से ताजमहल को बांस व बल्लियों से पूरी तरह ढंक दिया था। इससे जापान और जर्मनी के युद्धक विमानों को धोखा देने की कोशिश की गई थी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आगरा सर्किल कार्यालय की लाइब्रेरी में वर्ष 1942 में खींची गई तस्वीरें हैं। ये उस वक्त ताजमहल को बचाने में की गई पहल की गवाह हैं।
एएसआई के अधिकारी बताते हैं कि मित्र देशों (अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य) को खूफिया सूचना मिली थी कि जापान और जर्मनी ताजमहल पर बम बरसाने की कोशिश करने वाले हैं। इसी के बाद तुरंत ताजमहल पर बांस व बल्लियों का आवरण चढ़ा दिया गया था।
उस वक्त गुंबद को पूरी तरह से ढंका गया और इसकी तस्वीरें ली गईं। बाद में पूरे ताजमहल को ढंका गया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से वर्ष 1942 में तस्वीरें नहीं ली गईं।
इतिहासकार आरके सिन्हा कहते हैं कि आजादी के बाद भी एक बार ताजमहल को ढंका गया था। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वर्ष 1971 में ताजमहल पर खतरा मंडराने लगा था। उस वक्त ताजमहल को हरे कपड़े से ढंका गया था। ताकि पाकिस्तानी विमानों को ताजमहल की जगह हरियाली नजर आए।
दरअसल, यह खतरा इसलिए भी था, कि पाकिस्तानी बमवर्षक विमानों ने ताजमहल से करीब 10 किलोमीटर दूर एयफोर्स स्टेशन पर बम गिराए थे। हालांकि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से तस्वीरें नहीं ली गईं थी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संभावित हवाई हमलों से ताजमहल को बचाने के लिए कुछ ऐसी ही योजना बना रखी है। छह महीने पहले ही नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के साथ खूफिया तौर इसकी प्लानिंग की थी।
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