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कहां हुई राधा-कृष्‍ण की शादी, क्‍यों देनी पड़ी थी परीक्षा, जानें 10 अनसुनी स्‍टोरी

मथुरा में ब्रज चौरासी कोस यात्रा में कृष्‍ण की अनोखी लीलाओं के स्‍थल देखने को मिलते हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 21, 2016, 07:00 PM IST
यहीं हुई थी राधा-कृष्‍ण की शादी। यहीं हुई थी राधा-कृष्‍ण की शादी।
आगरा/मथुरा. होली पर मथुरा में भक्‍तों की भीड़ है। देश के ही नहीं विदेशी भी ब्रज की होली के प्रेमी हैं। वहीं, ब्रज चौरासी कोस यात्रा भी चल रही है। इस यात्रा में कृष्‍ण की अनोखी लीलाओं के स्‍थल देखने को मिलते हैं। ऐसे में हम आपको राधा कृष्‍ण से जुड़ी ऐसी 10 कहानियों को बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने पहले नहीं सुना होगा।
इस वन में हुई थी राधा-कृष्‍ण की शादी
भांडीरवन- ब्रज के संत रमेश बाबा बताते हैं, ब्रह्म पुराण और गर्ग संहिता के अनुसार राधा-कृष्‍ण का विवाह ब्रह्माजी ने यहीं करवाया था। भक्‍तों की भीड़ यहां उमड़ती है। श्रीमद भागवत के अनुसार प्रलंबासुर का वध भी बलराम ने यहीं किया था।
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राधा की नानी ने पहली बार किया था चारकुला नाच। राधा की नानी ने पहली बार किया था चारकुला नाच।
राधा के जन्‍म पर नानी ने पहली बार किया था चारकुला नाच

मुखराई गांव- राधारानी के जन्‍म की खबर जब उनकी नानी मुखराजी को मिली तो वह काफी खुश हो गईं। उन्‍होंने पास में रखे पहिए को उठा लिया और नाचने लगीं। होली में गांव की महिलाएं उसी परंपरा को निभाते हुए सिर पर चारकुल रखकर नाचती हैं।
 
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श्रीकृष्‍ण को भी देनी पड़ी थी परीक्षा। श्रीकृष्‍ण को भी देनी पड़ी थी परीक्षा।
गोवर्धन पर्वत उठाने से पहले कृष्‍ण को देनी पड़ी थी ताकत की परीक्षा

एैंठ कदम- इंद्र के प्रकोप से जब भारी बारिश हुई, तो भगवान कृष्‍ण गोवर्धन पर्वत उठाने चल दिए थे। उस समय लोगों ने उन्‍हें रोका और कहा कि गोवर्धन उठाना आसान नहीं है। अगर ताकत है तो कदंब के पेड़ को एंठ कर दिखाओ। तब कृष्‍ण ने दोनों हाथों से कदंब के पेड़ को ऐंठ दिया था। ताकत की परीक्षा देने के बाद कृष्‍ण गोवर्धन पर्वत उठाने पहुंचे।
 
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इसी वटवृक्ष की शाखाओं पर चढ़कर यमुनापार वृंदावन जाते थे कृष्‍ण इसी वटवृक्ष की शाखाओं पर चढ़कर यमुनापार वृंदावन जाते थे कृष्‍ण
वटवृक्ष की शाखाओं पर चढ़कर यमुनापार वृंदावन जाते थे कृष्‍ण
 
श्‍याम वन का वंशीवट- यह श्‍यामवन के 16 वटों में से एक है। यहां वट वृक्ष की शाखाएं बेहद लंबी थीं। ये शाखाएं यमुना को पार करती हुईं वृंदावन तक जाती थीं। भगवान कृष्‍ण इन्‍हीं शाखाओं पर चढ़कर वृंदावन जाते थे।
 
 
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माखन चोरी में हनुमान करते थे श्रीकृष्‍ण की मदद। माखन चोरी में हनुमान करते थे श्रीकृष्‍ण की मदद।
यहां हैं लुटेरे हनुमान, कृष्‍ण को माखन लूट में करते थे मदद

लुटेरे हनुमान मंदिर- प्राचीन कथा है कि जब कृष्‍ण दही की लूट मचाते थे तो हनुमान इसमें मदद करते थे। हनुमान आसमान से ही बता देते थे कि गोपियां माखन और दही लेकर आ रही हैं।
 
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मान्‍यता है कि आज भी मथुरा के वन में तपस्‍या करती हैं लक्ष्‍मी। मान्‍यता है कि आज भी मथुरा के वन में तपस्‍या करती हैं लक्ष्‍मी।
आज भी इस वन में तपस्‍या कर रही हैं लक्ष्‍मी

बेलवन- ब्रज में कृष्‍ण के महारास के दौरान लक्ष्‍मी को भी शामिल होने का अधिकार नहीं मिला था। वह यहां पर वास करने के लिए पेड़ के नीचे व्रत करने लगीं। माना जाता है कि पेड़ के नीचे आज भी देवी लक्ष्‍मी तपस्‍या कर रही हैं।
 
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कृष्‍ण ने यशोदा को दिखाया था मुंह में ब्रह्मांड। कृष्‍ण ने यशोदा को दिखाया था मुंह में ब्रह्मांड।
इस घाट पर कृष्‍ण ने यशोदा को दिखाया था मुंह में ब्रह्मांड

ब्रह्मांड घाट- बालरूप में कृष्‍ण के मिट्टी खाने की शिकायत मां यशोदा तक पहुंची। यशोदा ने कृष्‍ण से मुंह खोलकर दिखाने को कहा। तब यहीं पर कृष्‍ण ने अपना मुंह खोला और पूरा ब्रह्मांड दिखा दिया। यह देखकर यशोदा में एश्‍वर्य शक्ति आ गई थी। इसके बाद कृष्‍ण ने माधुरी शक्ति विकसित की और यशोदा ब्रह्मांड के बारे में भूल भी गईं।
 
 
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इस घाट पर नहाने से उतर जाता है कर्ज इस घाट पर नहाने से उतर जाता है कर्ज
इस घाट पर नहाने से उतर जाता है कर्ज

ऋणमोचन घाट- जब कृष्‍ण और बलराम कंस से युद्ध के लिए मथुरा निकले, तो उन्‍होंने सोचा कि नंदबाबा, यशोदा और गांव का ऋण कैसे मोचन करें। तब कृष्‍ण ने इस घाट को ऋणमोचन घाट का नाम दिया। माना जाता है कि जो व्‍यक्ति यहां पर स्‍नान या आचमन करेगा, वह सभी प्रकार के कर्ज से मुक्‍त हो जाएगा। यहां पर जाने का रास्‍ता टेढ़ा है। यहीं पर ऋणमोचन महादेव भी स्‍थापित हैं।
 
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पूतना के शरीर को ब्रजवासियों ने इसी जगह काट-काट कर जला दिया था पूतना के शरीर को ब्रजवासियों ने इसी जगह काट-काट कर जला दिया था
सुगंध से भरे पूतना के शरीर को ब्रजवासियों ने काट-काट कर जला दिया था

पूतनाखार- भगवान कृष्‍ण ने बालरूप में पूतना को यहीं पर मारा था। पूतना का शरीर कई कोस लंबा था। शरीर से सुगंध आ रही थी। पूरा गोकुल सुगंध से भर गया था। तब ब्रजवासियों ने शरीर को काट-काट कर जलाया था।
 
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ब्रह्मा ने चुराए थे कृष्‍ण के बछड़े और ग्‍वाल। ब्रह्मा ने चुराए थे कृष्‍ण के बछड़े और ग्‍वाल।
वत्‍सवन में ब्रह्मा ने चुराए थे कृष्‍ण के बछड़े और ग्‍वाल

वत्‍सवन- श्रीमदभागवत के अनुसार, वत्‍सवन गाय चराने के दौरान जब कृष्‍ण बालरूप में ग्‍वालबालों के साथ छाछ और झूठन खा रहे थे, तो ब्रह्मा को मोह हो गया। उन्‍होंने परीक्षा लेनी के लिए कृष्‍ण के सोते समय सभी ग्‍वालबालों और बछड़ों को चुरा लिया। दोपहर की नींद खुली तो कृष्‍ण ने अपनी माया से ग्‍वालों और बछड़ों को रूप दे दिया। बाद में ब्रह्मा ने कृष्‍ण से माफी मांगी थी।
 
 
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यहीं हुई थी राधा-कृष्‍ण की शादी।यहीं हुई थी राधा-कृष्‍ण की शादी।
राधा की नानी ने पहली बार किया था चारकुला नाच।राधा की नानी ने पहली बार किया था चारकुला नाच।
श्रीकृष्‍ण को भी देनी पड़ी थी परीक्षा।श्रीकृष्‍ण को भी देनी पड़ी थी परीक्षा।
इसी वटवृक्ष की शाखाओं पर चढ़कर यमुनापार वृंदावन जाते थे कृष्‍णइसी वटवृक्ष की शाखाओं पर चढ़कर यमुनापार वृंदावन जाते थे कृष्‍ण
माखन चोरी में हनुमान करते थे श्रीकृष्‍ण की मदद।माखन चोरी में हनुमान करते थे श्रीकृष्‍ण की मदद।
मान्‍यता है कि आज भी मथुरा के वन में तपस्‍या करती हैं लक्ष्‍मी।मान्‍यता है कि आज भी मथुरा के वन में तपस्‍या करती हैं लक्ष्‍मी।
कृष्‍ण ने यशोदा को दिखाया था मुंह में ब्रह्मांड।कृष्‍ण ने यशोदा को दिखाया था मुंह में ब्रह्मांड।
इस घाट पर नहाने से उतर जाता है कर्जइस घाट पर नहाने से उतर जाता है कर्ज
पूतना के शरीर को ब्रजवासियों ने इसी जगह काट-काट कर जला दिया थापूतना के शरीर को ब्रजवासियों ने इसी जगह काट-काट कर जला दिया था
ब्रह्मा ने चुराए थे कृष्‍ण के बछड़े और ग्‍वाल।ब्रह्मा ने चुराए थे कृष्‍ण के बछड़े और ग्‍वाल।
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