तस्वीर में: यूरोपियन परिवार द्वारा बनवाया गया लाल ताजमहल।
आगरा. जहां एक ओर ताजमहल के साथ शाहजहां का नाम जुड़ जाता है। वहीं, दूसरी ओर गुमनाम हो गया उस यूरोपियन ईसाई का नाम जिसने लाल ताजमहल बनवाया। इसे कुछ लोग बेबी ताजमहल के नाम से भी जानते हैं। शुक्रवार को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है। शहर में जगह-जगह गोष्ठियां होंगी, लोगों को जागरुक किया जाएगा। इसके बावजूद इतिहास की एक धरोहर और देश में एक यूरोपियन परिवार द्वारा बनाया गया एक स्मारक आज फिर पर्यटकों के बीच उपेक्षित बनकर रह जाएगा।
हर साल 27 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व पर्यटन दिवस पर तमाम संस्थाए विश्वदाय स्मारक के प्रति लोगों को जागरुक करती हैं। इसी तरह इस साल भी कुछ ऐसा ही होगा। राज्य और केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग भी विश्व प्रसिद्ध स्मारकों के संरक्षण के लिए गोष्ठियां आदि आयोजित करेंगी। इन सबके बावजूद इतिहास की एक धरोहर और देश में एक यूरोपियन ईसाई परिवार द्वारा अपने अजीज पिता की याद में बनाया गया एक स्मारक है जिसे शहर के कुछ लोग बेबी ताज के रूप में जानते हैं, वह आज फिर पर्यटकों के बीच उपेक्षित बनकर रह जाएगा।
गुमनाम हुआ लाल ताजमहल
शहर में बने ताजमहल को दुनियाभर में जाना जाता है। लोग यह भी जानते हैं कि इस खूबरसूरत इमारत को शाहजहां ने अपनी चहेती बेगम मुमताज की याद में बनवाया था, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि इसी शहर में एक ऐसी स्मारक है जो लाल ताजमहल के नाम से कहीं गुमनाम हो गई।
इस ताज के लाल पत्थर और ककईर्यां ईंट इस प्राचीन स्मारक के गवाह हैं कि अंग्रेजों के आगरा कब्जाने से पहले सन् 1500 के आसपास यहां ईसाइयों का पदार्पण हो चुका था। इसकी प्राचीन कब्रें और उसके मिटते अवशेष इस स्मारक के पांच सौ वर्ष से भी अधिक पुराने होने के पक्के सबूत हैं।
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