इलाहाबाद. लखनऊ के चिकित्सा शिक्षा और ट्रेनिंग महानिदेशक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। महानिदेशक को आगामी 10 मार्च को कोर्ट में व्यक्तिगत हलफनामा के साथ तलब भी किया गया है। यह हर्जाना इसलिए लगाया गया है क्योंकि महानिदेशक ने अदालत के आदेश की अनदेखी करते कर कानुपर कैंसर इंस्टीट्यूट में सुविधाओं को लेकर हलफनामा नहीं दायर किया था।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीवाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने कानपुर के मेसर्स जन उत्थान विधिक सेवासमिति की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका दायर कर कहा गया था कि कानपुर के कैंसर इंस्टीट्यूट में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भी कमी है।
इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर 2014 को कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल से भी हलफनामा मांगा था। प्रिंसिपल का हलफनामा आ गया था लेकिन निदेशक चिकित्सा शिक्षा और ट्रेनिंग ने हलफनामा नहीं दिया था। उनके इस कार्य से नाराज होकर कोर्ट ने निदेशक पर 10 हजार रुपए हर्जाना लगा दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फाइल फोटो।