इलाहाबाद. इलाहाबाद संगम तट पर पहुंचे विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने कहा कि जहां पर भगवान राम का जन्म हुआ है, उस स्थान को हम बदल नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यदि 60 बाद भी इस देश में यह बात सामने आती है कि राम जन्मभूमि कहां है, तो इससे बड़ी सांस्कृतिक पराधीनता क्या हो सकती है। ये बातें शनिवार को उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर कही।
इस दौरान उन्होंने कहा, ‘हो सकता है पहले मंदिरें तोड़ी गई होंगी और तीन हजार मंदिरों पर जामा मस्जिद खड़ी कर दी गई होंगी, लेकिन उसके स्थानों पर हमने लाखों मंदिर बना लिए। हालांकि, जहां पर भगवान का अवतरण हुआ है, उस स्थान को हम बदल नहीं सकते। इसलिए राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ ये स्थान मुक्त होने चाहिए।’
मिलकर रहने से देश में होगा विकास
अशोक सिंघल ने कहा, ‘भारत के भीतर हमने स्पष्ट रूप से इस्लाम धर्मावलंबियों और उन नेताओं से कहा है कि हम प्रेम के साथ रहना चाहते हैं। यदि हिंदू और मुस्लमान मिलकर भारत में रहेंगे तो इस देश के अंदर विकास के बड़े-बड़े कार्य कर सकते हैं। हालांकि, हिंदू की भावनाओं का ध्यान रखना होगा। हम केवल तीन मंदिर चाहते हैं, आप अपने दावे उनसे वापस ले लीजिए।’
राम सेतु को सोनिया ने किया था तोड़ने का प्रयास
वहीं, सिंघल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सेतु भगवान राम ने बनवाया था और जिस पर से उनकी सेना श्रीलंका गई थी उस राम सेतु को सोनिया गांधी ने तोड़ने का प्रयास किया। उस समय सोनिया ने राम सेतु को तोड़ने के लिए पत्थर रखा। जब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्यों न इस पर स्टे ऑर्डर पारित किया जाए तो उस समय की केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा लगाया कि भगवान राम भारत में पैदा ही नहीं हुए थे, इसलिए राम सेतु का यहां कोई अस्तित्व ही नहीं है।
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