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हाईकोर्ट NEWS: करोड़ों के NRHM घोटाले में पूर्व कैबिनेट मंत्री कुशवाहा की जमानत मंजूर

4 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनआरएचएम घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा है कि याची को दो लाख के बेलबाण्ड व बीस लाख की दो प्रतिभूति लेकर रिहा किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश सह अभियुक्तों पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्र, राम प्रसाद जायसवाल, रईस अहमद सिद्दीकी व महेन्द्र कुमार  पाण्डेय की जमानत पहले ही मंजूर होने के आधार पर समानता (पैरिटी) देते हुए दिया है।
 

यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन ने दिया है। याची पर आपराधिक षडयंत्र व धोखाधड़ी करने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। याची के विरुद्ध चार चार्जशीट दाखिल हुई है। मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मंत्री होने के नाते साक्ष्य में दखल करने की संभावना को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने याची को ट्रायल में सहयोग करने, साक्ष्यों से  छेड़छाड़ न करने और ट्रायल में देरी की टैक्टिस न अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रक्रिया दो माह में पूरी की जाए और जमा होने वाली धनराशि का सरकार एनआरएचएम मिशन के लिए इस्तेमाल करे।
 
 
2. यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी को मुआवजा निर्धारण का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के चांदपुर गांव की 97,3747 हेक्टेयर यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी के लिए हुए अधिग्रहण को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दो माह के भीतर जमीन व उस पर हुए निर्माण का मूल्यांकन कर 2013 के कानून के तहत मुआवजे का भुगतान किया जाए। जिनको मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता तो उसकी जमीन वापस की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की खंडपीठ ने रमोराज सिंह व अन्य किसानों की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता का कहना है कि 19 फरवरी 10 को जमीन का धारा 4 व 6 एवं 17 के तहत अर्जेन्सी क्लाज में अधिग्रहण किया गया। भूमि अध्रिगहण सुनियोजित विकास के लिए किया गया। कोर्ट ने नये कानून के तहत मुआवजे का भुगतान का निर्देश दिया है।
 
 
3. पुष्टाहार-खाद्यान्न वितरण पर हाईकोर्ट सख्त, एक महीने में अधिकारियों की तैनाती के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को बच्चों को पुष्टाहार एवं राशनकार्ड धारकों को खाद्यान्न आपूर्ति निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है और कहा है कि कर्तव्य पालन न करने वाले लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने सूखा एवं मिड डे मील योजना का कड़ाई से पालन करने का भी निर्देश दिया है।
 

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी.केशरवानी ने इलाहाबाद छतरगढ़ निवासी राम लखन की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने एक माह के भीतर सभी जिलों में जिला शिकायत निवारण अधिकारी की तैनाती करने का आदेश देते हुए कहा है कि राज्य सरकार शिकायत निवारण तंत्र विकसित करे और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 को लागू करते हुए योजना को क्रियाशील करे। कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि 30 दिन के भीतर नियम 5 (3) के अन्तर्गत जिला शिकायत निवारण अधिकारियों के वेतन भत्ते सहित शिकायत प्राप्त कर व निस्तारण अवधि की अधिसूचना जारी करे। कोर्ट ने पुष्टाहार व खाद्य सामग्री वितरण के खिलाफ शिकायत 90 दिन के भीतर तय करने का भी आदेश दिया है साथ ही कहा है कि 30 दिन के भीतर लापरवाह तथा कर्तव्य न पालन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। कोर्ट ने जिला, ब्लाक व सस्ते गल्ले की दुकान स्तर पर विजिलेंस कमेटी गठित करने और उसे क्रियाशील करने का राज्य सरकार को एक माह का समय दिया है।
 
 
कोर्ट ने कहा है कि यदि 30 दिन में कमेटियां पूरे प्रदेश में गठित नहीं हो जाती तो 30 दिन में दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने जिला पूर्ति अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वह कमेटी की कार्यप्रणाली व उपभोक्ता के अधिकारों की जानकारी गल्ले की दुकान के बोर्ड या  दीवाल पर लिखवाए। कोर्ट ने वितरण प्रणाली की निगरानी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर खरीद फरोख्त पर नजर रखने को कहा है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में 13 मई 16 के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का भी निर्देश दिया है। कहा है कि आदेश की प्रति पालन के लिए मुख्य सचिव को भेजी जाए।
 

4. फारेस्ट रेंज अधिकारी के खिलाफ केस चलाने के लिए शासन की अनुमति जरूरीः हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि फारेस्ट रेंज अधिकारी के खिलाफ केस चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत शासन की अनुमति जरूरी है। बिना शासन की अनुमति बगैर अधिकारी के खिलाफ मजिस्ट्रेट आपराधिक केस नहीं चला सकता। कोर्ट ने इसी के साथ सपा के तत्कालीन विधायक अरविन्द गिरि के इशारे पर एसीजेएम खीरी के समक्ष लंबित आपराधिक केस को शासन की अनुमति न होने के आधार पर रद्द कर दिया।
 
 
यह आदेश न्यायमूर्ति केजे ठाकर ने फारेस्ट रेंज अधिकारी दिग्विजय सिंह की धारा 482 के अन्तर्गत दायर अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार बाजपेयी ने मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि सपा विधायक याची से नाराज रहता था। इस कारण उन्हीं के इशारे पर फर्जी केस दर्ज कर याची के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जबकि फारेस्ट रेंज अधिकारी के खिलाफ आपराधिक केस चलाने से पहले शासन की अनुमति नहीं ली गयी थी। अदालत ने उक्त आधार पर एसीजेएम के समक्ष विचाराधीन मुकदमे को रद्द कर दिया है।
 
 
5. प्रधान का चुनाव रद्द करने का आदेश वैध
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भदोही जिले की ज्ञानपुर तहसील की काशीदहन ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान के चुनाव को शून्य करार देते हुए रद्द करने के जिला न्यायालय के फैसले को वैध करार दिया है और कहा है कि याची प्रधान पर सरकारी देनदारी थी और उसने नामांकन दाखिल करते समय इस तथ्य को छिपाया। यदि बताया होता तो वह चुनाव ही नहीं लड़ सकता। ऐसे में तथ्यों को छिपाकर लड़ा गया चुनाव पंचायतराज एक्ट की धारा 5-ए (इ) के खिलाफ है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी.केसरवानी ने ग्राम प्रधान लवधार मौर्या की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
 

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