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सीएम कार्यालय की चिट्ठी पर रेप पीड़ि‍ता छात्रा की विवेचना हटाने पर यूपी सरकार तलब

6 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. सीएम कार्यालय के ओएसडी के निर्देश पर मथुरा के चर्चित एमबीए की छात्रा से रेप के मामले की जांच मथुरा से हटाकर फिरोजाबाद ट्रांसफर कर देने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसको लेकर दायर एक जनहित याचिका पर यूपी सरकार से आवश्यक जानकारी तलब की है। इसके साथ ही याचिका पर सुनवाई के लिए 19 फरवरी की तारीख तय की है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने मथुरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयपाल सिंह तोमर की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका दायर कर डीजीपी यूपी के 22 दिसंबर 2014 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके द्वारा सीएम कार्यालय से जारी पत्र के आधार पर एमबीए की छात्रा से मथुरा में हुई रेप के घटना की जांच फिरोजाबाद कर दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि रेप पीडि़ता का द­प्र­सं­ के अंतर्गत मजिस्‍ट्रेट के समक्ष 12 दिसंबर 2014 को हो चुका था और इस बयान में पीडि़ता छात्रा ने रेप के घटना की पुष्टि की थी। आरोप है कि इसकी जानकारी होने पर विवेचना को बदलवा दिया गया है। ज्ञात हो कि बलात्कार पीडि़ता एमबीए की छात्रा है। आरोप है कि उसके साथ आरोपी कमलाकांत उपमन्यू अधिवक्ता ने बलात्कार की इस घटना की प्राथमिकी 6 दिसंबर 2014 को धारा 376, 506 आईपीसी के अंतर्गत थानांतर्गत हाईवे मथुरा में दर्ज हुआ। इसकी जांच दरोगा रीना द्वारा किया जा रहा था।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।