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एएमयू में छात्रों के प्रवेश में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

7 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में छात्रों के प्रवेश में आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार और यूनिवर्सिटी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचुड और जस्टिस दिलीप गुप्ता की बेंच ने अनूप प्रभाकर और कई अन्य की याचिका पर यह जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि एएमयू, बीएचयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ संविधान के केंद्रीय सूची की प्रविष्टि-63 में दर्ज है। एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त नहीं है। ऐसे में अन्य यूनिवर्सिटी की तरह इस यहां भी सेंट्रेल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन रिजर्वेशन इन एडमिशन रूल्स-2006 लागू किया जाना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि अन्य सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एससी/एसटी, ओबीसी आदि के छात्रों को एडमिशन में आरक्षण का प्रावधान लागू है। इसके बाद भी एएमयू में ऐसा नहीं होना असंवैधानिक है।

जंतु उद्यानों से 10 किमी की परिधि में असलहा लेकर जाने पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के जंतु उद्यानों से 10 किमी की परिधि में असलहा लेकर जाने पर रोक लगा दी है। इसके लिए वहां के चीफ वार्डन की एनओसी लेना जरूरी होगा। कोर्ट ने यह आदेश जंतु उद्यानों में विलुप्त हो रहे वन्य जीवों को संरक्षण देने और उनकी सुरक्षा की दृष्टि से दिया है। इसको लेकर कोर्ट ने यूपी सरकार के वन्य जीव संरक्षण एक्ट-1972 की धारा 34 (3) के उपबंधों का पालन करने के लिए सभी जिलाधिकारियों को परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

इस धारा में प्रावधान है कि बिना मुख्य वार्डन की अनापत्ति के अभ्यारण से दस किमी की परिधि में कोई भी शस्त्र लाइसेंस वर्जित है। कोर्ट ने पूर्व में जारी शस्त्र लाइसेंस को लेकर भी पुनर्विचार करने को कहा है। कहा गया है कि अमरोहा में 133 शस्त्र लाइसेंसों को गलत तरीके से दिया गया है। यह आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चन्द्रचुड और जस्टिस दिलीप गुप्ता की बेंच ने अमरोहा के डॉ. रवीन्द्र शुक्ला और दो अन्य की जनहित याचिका पर दिया है।
बीएड टीचरों पर दोहरा मापदण्ड को लेकर प्रमुख सचिव तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के प्रमुख सचिव बेसिक को तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि जूनियर हाईस्कूलों में बीएड डिग्री धारी 90 फीसदी टीचरों को वेतन दिया जा रहा है। ऐसी ही डिग्री से नियुक्ति पाए याचिकाकर्ता को वेतन देने से क्यों इनकार किया जा रहा है।

कोर्ट ने प्रमुख सचिव से यह भी पूछा है कि वर्ष 2008 के बाद जब बीएड डिग्री को असिस्टेंट टीचर नियुक्ति की अर्हता मान लिया गया है तो वर्ष 2008 से पहले के बीएड डिग्रीधारकों के साथ दूसरे तरीके से व्यवहार क्यों किया जा रहा है। यह आदेश जस्टिस एआर मसूदी ने राजकुमार शुक्ला की याचिका पर दिया है।