इलाहाबाद. यूपी में गंगा और सहायक नदियों के किनारे बसे सभी शहरों में उच्चतम बाढ़ बिंदु से 500 मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। उसने इस पर रोक लगाने की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय गंगा बेसिन अथॉरिटी, यूपी सरकार, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
यह आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस
पीकेएस बघेल की बेंच ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता माघवेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने इस याचिका पर पक्षकारों से जवाब मांगते हुए गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने संबंधी याचिका के साथ सुनवाई करने को कहा है।
जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता का कहना है कि गंगा और उसकी सहायक नदियां यमुना, राम गंगा, गोमती, घाघरा, गंगटक, कोशी, काली तथा इनकी अन्य सहायक नदियों चंबल, सिंध, बेतवा, केन, टोंस, सोन, दामोदर, कंगनसबती तथा हल्दी के उच्चतम बाढ़ बिन्दु से पांच सौ मीटर तक विकास प्राधिकरणों, प्राइवेट बिल्डरों और जनसामान्य को पूरे प्रांत में निर्माण पर रोक लगाई जाए।
फोटोः प्रतीकात्मक।