पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • High Court Decision Will Have An Impact On The Image Of The Judiciary Latest News Hindi

रिटायर्ड जस्टिस ने कहा- हाईकोर्ट के फैसले से न्यायपालिका की छवि पर पड़ेगा अच्छा असर

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इलाहाबाद. हाईकोर्ट द्वारा 11 ट्रेनी जजों की बर्खास्तगी के फैसले पर न्यायविदों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। न्यायविदों का कहना है कि, कोर्ट के फैसले से न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा। इस फैसले से लोगों को आभास होगा कि ऊंचे पदों पर बैठने वालों को भी मर्यादा का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने अपने ही अधीनस्थ अधिकारियों के खिलाफ यह फैसला लेकर समाज, लोकतंत्र समेत दूसरे स्तंभों को एक बेहतर संदेश दिया है।

रिटॉयर्ड न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय फुलबेंच के फैसले की सराहना करते हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से न्‍यायपालिका की गिरती साख को एक मजबूती मिलेगी। जजों के खिलाफ ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि समाज में जज को एक अलग सम्मान है। वह अपनी न्यायप्रियता और आदर्श जीवन के लिए जाना जाता है। यदि इस तरह के मामलों में कड़े फैसले नहीं लिए जाएंगे तो समाज में नकारात्‍मक संदेश फैलेगा।

बार अध्यक्ष ने फैसले को ठहराया सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय कहते हैं कि, ट्रेनी जजों की हरकत पर कोर्ट का निर्णय सही है। किसी भी संस्था में ऊंचे पदों पर बैठने वालों से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती है। बेहतर होगा कि ऐसे फैसले हर स्तर पर लिए जाएं। एसोसिएशन के सचिव सी.पी. उपाध्याय ने कहा कि ट्रेनी जजों की बर्खास्तगी का फैसला बिल्कुल सही है। कोर्ट के निर्णय पर कोई सवाल उठाया भी नहीं जा सकता। हालांकि, शायद इस निर्णय को लेने में न्याय के सिद्धांत का पूरी तरह से पालन नहीं हुआ है।

न्यायपालिका में हर स्तर पर हों ऐसे निर्णय

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अनिल तिवारी के मुताबिक, न्यायपालिका में हर स्तर पर ऐसे फैसलों की जरूरत है। यह निर्णय कड़ा जरूर है लेकिन न्यायपालिका की छवि सुधारने के लिए यह जरूरी था। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कंदर्प नारायण मिश्र ने कहा कि ज्यूडिशियल सर्विस में आने के बाद व्यक्ति का आचरण उच्च स्तर का होना चाहिए। जो घटना सामने आयी है, इससे यह साफ होता है कि आरोपी जजों का आचरण उसके अनुरूप नहीं था।

फोटो: रिटायर्ड जस्टिस गिरधर मालवीय।