इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने बर्खास्त सहायक निबंधक कानूनगो को सेवानिवृत्त परिलाभों का भुगतान न किए जाने के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि याची यह बताने में विफल रहा है कि बर्खास्तगी के बाद कौन सा देय बाकी है। कोर्ट द्वारा उसकी बर्खास्तगी की पुष्टि किए जाने के बाद याची सेवानिवृत्त परिलाभों का भुगतान पाने का अधिकारी नहीं है।
यह आदेश जस्टिस सुनीत कुमार ने इन्द्र प्रसाद की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची इन्द्र प्रसाद को लेखपाल पद से सहायक निबंधक कानूनगो के पद पर प्रोन्नति दी गयी थी। सेवा के बीस वर्ष बाद भ्रष्टाचार के आरोप में 18 सितम्बर वर्ष-1991 को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ अपील भी खारिज हो गई। बरेली के आयुक्त के आदेश एवं बर्खास्तगी को 2014 में चुनौती दी गई थी।
डीआईजी अवमानना के मामले में तलब
उधर, एक अन्य मामले में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को अवमानना के मामले में तलब कर लिया गया है। हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना करने पर मुरादाबाद डीआईजी राम गोपाल वर्मा को तलब किया है। कोर्ट ने इन्हें 22 जनवरी को हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है कि उन्होंने आदेश का पालन क्यों नहीं किया और क्यों न उनके खिलाफ अवमानना का आरोप तय किया जाए।
कोर्ट ने दो बार आदेश के पालन का अवसर दिया था, इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। यह आदेश जस्टिस आरडी खरे ने कांस्टेबल हरीश कुमार की अवमानना याचिका पर दिया है। कोर्ट ने विपक्षी को तीन माह में याची के प्रत्यावेदन करने का आदेश दिया था, जिसका पालन नहीं किया गया।
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