इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने 20 ट्रेनी जजों को मंगलवार को सस्पेंड कर दिया। सभी आरोपी जजों पर लखनऊ में ट्रेनिंग के दौरान एक लड़की से बदतमीजी करने का आरोप है। मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनी थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट के मुख्य जज डीआई चंद्रचूड़ ने नौ अन्य सीनियर जजों ने इन्हें दोषी पाया। कोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी ने आरोपी इन 20 जजों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सस्पेंड कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2012 बैच के 74 ट्रेनी जजों को लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च में इंडक्शन प्रोग्राम के लिए भेजा गया था। इसमें 40 जिलों के ट्रेनी जज शामिल थे। इंडक्शन प्रोग्राम नौ जून से आठ सितंबर 2014 के बीच आयोजित किया गया और इसमें 22 महिला ट्रेनी जज भी शामिल हुईं। ट्रेनी जजों में एडिशनल सिविल जज, सिविल जज जूनियर डिवीजन और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने भी हिस्सा लिया।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचुड़ ने शिकायत पर बनाई थी कमेटी
ट्रेनिंग एंड रिसर्च में इंडक्शन प्रोग्राम में 40 ट्रेनी जजों ने एक लड़की से बदतमीजी की। इसकी शिकायत चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचुड़ तक पहुंची, तो उन्होंने एक जांच कमेटी का गठन कर दिया था। कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद सोमवार को हाईकोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी की बैठक हुई। इसमें चीफ जस्टिस के साथ ही 9 अन्य सीनियर जज शामिल हुए। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 20 ट्रेनी जजों को दोषी पाया गया है। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी ने सस्पेंड कर दिया।
क्या कहते हैं रजिस्ट्रार जनरल
रजिस्ट्रार जनरल प्रत्यूष कुमार ने इस संबंध में बताया कि सोमवार को एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें कुछ निर्णय भी लिए गए हैं। हालांकि कमेटी का निर्णय अभी बताया नहीं जा सकता, क्योंकि निर्णय पर जज के साइन नहीं हुए हैं। साइन होने के बाद ही निर्णय को सार्वजनिक किया जाएगा।
आईजेटीआर निदेशक पर भी गिरी गाज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को इंस्टीट्यूट ऑफ ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईजेटीआर) में नए निदेशक की तैनाती के आदेश जारी कर दिए। रजिस्ट्रर जनरल प्रत्यूष कुमार ने बताया कि शामली में आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी रहे महबूब अली को नया निदेशक बनाया गया है। अब तक डॉ. अनुपम गोयल कार्यवाहक निदेशक के रूप में यहां कार्यरत थे। सूत्रों की मानें, तो संस्थान में ट्रेनी जजेज द्वारा की गई लड़की से बदतमीजी के मामले में ही उन्हें पद से हटाया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल तस्वीर)