फाइल फोटोः मां दुर्गा का विसर्जन करते हुए भक्त
- वन विभाग ने दुर्गा विसर्जन के लिए नहीं दी खुदाई की अनुमति
- प्रबंध समिति के तदर्थ प्राचार्य नियुक्ति पर कोर्ट ने लगाई मुहर
इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने वाराणसी की गंगा नदी में दुर्गा विसर्जन के लिए इस साल छूट दे दी है। शुक्रवार को कोर्ट ने यह आदेश प्रशासन के वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाने की वजह से दिया है। कोर्ट में अर्जी देकर प्रशासन पहले के आदेश को संशोधित करने की मांग की थी, जिसमें गंगा और यमुना नदियों में मूर्तियों के विसर्जन पर हाईकोर्ट ने नौ अक्टूबर 2012, छह नवंबर 2012 और सात अक्टूबर 2013 के आदेशों से रोक लगा दी है।
प्रदेश के अन्य जिलों में मूर्तियों का विसर्जन वहां पर की गई वैकल्पिक व्यवस्था में ही होगा। इलाहाबाद में मूर्तियों के विसर्जन के लिए संगम एरिया में काली सड़क के पास सौ गुणा पचास मीटर का तालाब बना दिया गया है। इसी तालाब में यहां पर मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। वाराणसी में कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन नहीं कर सका, इसकी वजह से कोर्ट ने यह छूट दे दी। इसके लिए जिला प्रशासन पहले ही अर्जी दाखिल कर दिया था।
वन विभाग ने नहीं दी खुदाई की अनुमति
शुक्रवार को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचुड और जस्टिस दिलीप गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान वाराणसी के जिलाधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह और मुख्य स्थाई अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि वाराणसी में शहर साइड में पक्के घाट हैं। गंगा के उस पार कछुओं का राष्ट्रीय स्तर का अभ्यारण है, इस कारण वन विभाग उस पर मूर्तियों के विसर्जन के लिए एक इंच भी खुदाई की अनुमति नहीं दे रहा है।
प्रशासन अगले साल करेगा वैकल्पिक व्यवस्था
आदेश में कोर्ट ने कहा कि अगले वर्ष हर कीमत पर वाराणसी में भी मूर्तियों के विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर ली जाए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि मूर्तियों के निर्माण आदि को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्ष 2010 की नीतियों का कड़ाई से पालन किया जाए।
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