इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के कांठ में बीजेपी कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच झड़प में आरोपी 60 लोगों की मंगलवार को जमानत मंजूर कर ली। यह झड़प चार जुलाई को एक शिवालय में लाउडस्पीकर लगाने से प्रशासन द्वारा मना करने को लेकर हुई थी। पथराव में डीएम की आंख में गंभीर चोट लग गई थी। हरमीत सिंह समेत सभी 60 अभियुक्तों ने जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। जमानत पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए।
आरोपियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव ने कहा कि घटना भीड़ द्वारा अंजाम दी गई थी। किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका तय करना संभव नहीं है। भीड़ ने पुलिस और प्रशासन पर हमला बोला था। आरोपी उसमें शामिल थे या नहीं, यह तय नहीं है। कोई साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं है।
क्या थी झड़प की वजह
बताते चलें कि शिवमंदिर से लाउडस्पीकर उतरवाने के प्रशासनिक आदेश के खिलाफ वहां पंचायत हुई थीं। पंचायत रोकने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर भीड़ ने हमला बोल दिया था। इस घटना में डीएम की आंख में गंभीर चोट लगी थी।
डीएम को सभी शस्त्र लाइसेंस के आवेदन निस्तारण का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के डीएम को निर्देश दिया है कि वह अपने यहां लंबित शस्त्र लाइसेंस से संबंधित सभी आवेदनों का चार माह में निस्तारण करें। बरेली जिला में शस्त्र लाइसेंस की चार हजार से भी अधिक आवेदन पत्र लंबित हैं। बताया गया था कि बरेली में चार हजार से अधिक अर्जियां लंबित हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने इस्लामुद्दीन की याचिका पर दिया है। याचिका में मांग की गयी थी कि वर्षों से पड़े याचिकाकर्ताओं के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पत्र का निस्तारण किया जाए।
प्रमुख सचिव चिकित्सा को अवमानना नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा और मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को अवमानना की नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करने का एक और मौका दिया है और अनुपालन की रिपोर्ट हलफनामा के साथ देने को कहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज नकवी ने अधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि कोर्ट ने उसकी याचिका पर सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय में तमाम सुविधाएं बहाल करने का आदेश था, लेकिन वहां पर अभी भी सुविधाएं बहाल नहीं की गई हैं।