फोटो: महात्मा गांधी मार्ग पर अंडरग्राउंड वाटर सप्लाई लाइन में लीकेज के कारण सड़क पर बहता पानी।
- हर दिन हो रहा 9 करोड़ लीटर पानी बर्बाद
- कर्मचारियों को नहीं दिया गया है प्रशिक्षण
इलाहाबाद. इलाहाबाद शहर को प्रतिदिन 31 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें से 9 करोड़ लीटर पानी सिर्फ नालों और सड़कों पर बह जाता है। पानी की इस बर्बादी से पूरे शहर में जलापूर्ति का संकट बना हुआ है। अगर पॉश इलाकों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश इलाकों में हर दिन पानी के लिए हाहाकार मची रहती है। इस मामले में जलकल विभाग ने पानी की बर्बादी 15-20 प्रतिशत करने की बात कही है। वर्तमान में 35 प्रतिशत पानी की बर्बादी बदस्तूर जारी है।
इलाहाबाद शहर की कुल आबादी 16 लाख है। इसके लिए जलकल विभाग हर दिन 308 एमएलडी यानी करीब 30.80 करोड़ लीटर जलापूर्ति करता है। इसके अलावा 243 ट्यूबवेल के जरिए 138 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है। सीधे यमुना से 70 एमएलडी पानी लिया जाता है। पानी की बर्बादी का एक प्रमुख कारण क्षतिग्रस्त्ा वाटर लाइन है। विभाग की उदासीनता से यह संकट दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
नई सीवर और पेयजल लाइन बनी समस्या
शहर में होने वाली पानी की बर्बादी का एक बड़ा कारण कुंभ मेले के दौरान बिछाई गई नई सीवर और पेजयल लाइन को माना जा रहा है। जेएनएनयूआरएम के तहत गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और जल निगम ने शहर में नई लाइनें बिछाईं। इस काम को पूरा करते समय लगभग सौ स्थानों पर पुरानी वाटर लाइनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जिनमें अधिकांश की मरम्मत आज तक नहीं हो पाई है। इसकी वजह से करोड़ों लीटर पानी सड़कों और नालों में बहता है।
कर्मचारियों के प्रशिक्षण के बाद रुकेगी बर्बादी
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आर.बी. सिंह ने कहा, लीक डिटेक्टर इक्यूपमेंट का प्रशिक्षण देने के लिए चेन्नई से विशेषज्ञ आए थे। हालांकि, वे प्रशिक्षण पूरा कराए बिना ही वापस लौट गए। इस मामले में जल निगम को दोबारा पत्र लिखा गया है। प्रशिक्षण पूरा होते ही लाइनों की मरम्मत शुरू कराई जाएगी। इससे पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा और आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी।
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