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चाचा नेहरू के जन्‍मस्‍थल पर कभी होता था मुजरा, आज वेश्‍यावृत्‍ति बनी आफत

6 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. इलाहाबाद का मीरगंज इलाका, जहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्‍म हुआ था, आज बदनाम गलियों के रूप में जाना जाता है। यहां कभी मुजरा हुआ करता था, लेकिन अब यहां हो रही वेश्‍यावृति स्‍थानीय लोगों के लिए आफत बन गई है। दूसरी ओर, यह इलाका अपराधियों का शरणगाह बन चुका है और क्षेत्र के लोगों का जीना दूभर हो गया है। इससे आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को कोतवाली स्‍थित इस मोहल्‍ले में जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया और वेश्‍यावृत्‍ति बंद करो के नारे लगाए।
विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि मीरंगज में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्‍म हुआ था। इसी मोहल्‍ले में उन्होंने अपने बचपन के 10 साल गुजारे थे, लेकिन आज यह इलाका वेश्‍यावृत्‍ति (देह व्‍यापार) के रूप बदनाम हो चुका है। इसकी वजह से अपराधियों का शरणगाह भी बन चुका है। ऐसे में मोहल्‍ले के बच्‍चों पर इसका गलत असर पड़ रहा है। इसलिए उनकी मांग है कि यहां हो रहे देह व्‍यापार के धंधे को पूरी तरह नष्‍ट किया जाए और चाचा नेहरू के इस जन्‍म स्‍थान को भारत के धरोहर की तरह सम्‍मान दिया जाए। लोगों की मानें तो यहां पहले मुजरा हुआ था, जो धीरे-धीरे वेश्‍यावृत्‍ति में बदल गया।
महज 50 मीटर की दूरी पर है पुलिस चौकी
प्रदर्शन का नेतृत्‍व कर रहे समाजसेवी सुनील चौधरी ने बताया कि संगम नगरी इलाहाबाद का मीरगंज इलाका चाचा नेहरू का जन्‍मस्‍थल तो है ही, साथ ही यहां हर रोज लाखों रुपए का सर्राफा व्यापार होता है। हालांकि, यहां वेश्‍यावृत्‍ति होने की वजह से सभ्य लोग आने से कतराते हैं। उन्‍होंने बताया कि यह बाजार पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर है, लेकिन कभी भी जिस्मफरोशी के धंधे को रोकने के लिए पुलिस सक्रिय नहीं हुई। कभी-कभी किसी सामाजिक संस्था या अधिकारियों के दबाव में छापेमारी जरूर की जाती है, लेकिन दो-चार दिन बाद फिर से बाज़ार जिस्म बेचने वालों से गुलज़ार हो जाती है।
सुबह-शाम लगी रहती है मनचलों की भीड़
उन्‍होंने बताया कि इस बाज़ार में नाबालिग लड़कियां भी इस धंधे में शामिल होती हैं। मीरगंज इलाका केवल शहर में ही नहीं बल्‍कि वेश्यावृत्ति के लिए आसपास के जिलों में भी मशहूर है। यहां सुबह से शाम तक मनचलों की भीड़ लगी रहती है। ये वेश्याओं को देखकर फब्तियां कसते हैं और गंदी-गंदी हरकते करते हैं। इन्हीं गलियों में कुछ शरीफ परिवार भी रहते हैं, जो बेबसी और परेशानी में दिन काट रहे हैं, क्‍योंकि उनके बच्‍चों पर इसका गलत असर पड़ रहा है। ऐसे में इस माहौल में उनका रहना मुश्किल हो गया है।
आगे पढ़िए मीरगंज में रहने वालों के यहां बहन-बेटी के रिश्‍ते आने तो दूर, रिलेटिव भी आना पसंद नहीं करते