फोटो: आईईआरटी कॉलेज का मेनगेट।
इलाहाबाद. आईईआरटी में रैगिंग को लेकर हुई कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को एक बार फिर छात्रों ने क्लास का बायकॉट कर दिया। इसके बाद टीचर भी धरने पर बैठ गए। वे दोनों स्टूडेंट और टीचरों पर हुई कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे थे। इससे संस्थान में शिक्षक कार्य ठप पड़ गया है। इस मामले की जानकारी मिलने पर संस्थान के निदेशक ने शिक्षकों से बात कर उनका पक्ष रखने का आश्वासन दिया है। हालांकि, टीचरों ने कार्रवाई वापस होने तक क्लास नहीं लेने का फैसला लिया है।
आईईआरटी में रैगिंग का मामला प्रकाश में आने के बाद पूर्व कमिश्नर बादल चटर्जी ने अपर आयुक्त प्रशासन कनकलता त्रिपाठी के नेतृत्व में एक जांच टीम का गठन किया था। इस टीम ने संस्थान के अयोध्या हॉस्टल सहित दूसरे हॉस्टलों और परिसर में रहने वाले कर्मचारियों के बयान लिए। टीम ने अपनी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर ने संस्थान के निदेशक को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था। संस्थान के निदेशक विमल मिश्र ने रिपोर्ट मिलने के बाद तीन छात्राओं और दो छात्रों को संस्थान से दो साल के लिए सस्पेंड कर दिया था।
जूनियर छात्रों को बनाया जाता था मुर्गा
कमिश्नर द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। रिपोर्ट में बताया गया था कि, जूनियर स्टूडेंट्स को निर्वस्त्र कर दिया जाता था। इसके बाद उन्हें मुर्गा बनने के लिए विवश किया जाता था। उनसे अश्लील गाना गाने को कहा जाता था। हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स को सिर पर बाल नहीं रखने जबकि बाहर रहने वाले जूनियर स्टूडेंट्स को जीरो साइज बाल रखने का फरमान था।
जांच में यह बात सामने आई है कि जूनियर स्टूडेंट्स को स्पाइडर मैन की तरह जाली पर चढ़ने को मजबूर किया जाता था। जूनियर स्टूडेंट्स को वाटर प्यूरीफायर या आरओ का पानी पीने नहीं दिया जाता था। उन्हें टंकी का पानी पीने के लिए मजबूर किया जाता था। लड़कियों के लिए दो चोटी रखने का फरमान जारी किया गया था।
आगे पढ़िए, इन टीचरों के खिलाफ हुई थी कार्रवाई...