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चीनी मिलों की याचिका पर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को किया तलब

7 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. गन्ना मिल मालिकों की याचिका पर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को झटका दे दिया है। मिल मालिकों की गन्ना खरीद के लिए दबाव डालने की याचिका पर कोर्ट ने यूपी सरकार को जवाब तलब किया है। किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का पूरा भुगतान करवा पाने में नाकाम यूपी सरकार के लिए यह बड़ा झटका है।

दो दर्जन से अधिक निजी चीनी मिलों की याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इसमें वर्तमान पेराई सत्र के लिए एरिया आरक्षित कर उन्हें गन्ना खरीद के लिए विवश नहीं करने को कहा गया है। कोर्ट से मांग की गई है कि जब तक सरकार सही तरीके से गन्ना मूल्य तय नहीं करती, तब तक उन्हें एरिया आरक्षित करने के लिए दबाव न डाला जाए।
मिलों ने कहा- ठोस हल निकाले सरकार
यह सुनवाई जस्टिस दिलीप गुप्ता और एमसी त्रिपाठी की बेंच में हुई। यूपी शुगर मिल एसोसिएशन और 25 अन्य निजी चीनी मिलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को कोर्ट ने यह आदेश दिए। गन्ना मिल मालिकों ने याचिका में यह भी कहा है कि सरकार कोई ठोस हल निकाले। मामले की अगली सुनवाई दस अक्टूबर को होगी।
उत्पीड़न की कार्रवाई न करे सरकार
चीनी मिलों का यह भी कहना है कि सरकार इसको देखते हुए कोई उत्पीड़न की कार्रवाई न करें। सरकार कोआपरेटिव चीनी मिलों को आर्थिक मदद देती है, जबकि प्राइवेट चीनी मिलों को आर्थिक मदद नहीं मिल रही है। इस याचिका में पश्चिमी यूपी और पूर्वी यूपी की लगभग सभी निजी चीनी मिलें शामिल हैं।
करार भंग होने पर याचिका पर सुनवाई नहीं
सरकारी विभाग से किसी निजी फर्म और व्यक्ति के साथ करार भंग की सुनवाई हाईकोर्ट में नहीं होगी। यह आदेश हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाद को हल करने के लिए याचिका स्पेशल रिलीफ एक्ट-1963 तहत अधीनस्थ कोर्ट में दायर की जाए। यह आदेश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचुड और दिलीप गुप्ता की बेंच ने मेसर्स अम्बे कैरियर और अन्य की याचिका पर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ता को कुशीनगर और देवरिया सदर केंद्र से कप्तानगंज और सुकरौली केंद्र पर खाद्यान्न आपूर्ति का ठेका दिया गया। वह मालवाहक का कार्य करता था। बाद में कार्य करने का ठेका भंग कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे सुने बिना उसका करार भंग कर दिया गया। कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।