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यूपीपीसीएस: नई आरक्षण नीति वापस ली गई, छात्रों पर दर्ज मुकदमें भी वापस लिए जाएंगे

8 वर्ष पहले
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इलाहाबाद। आखिरकार यूपीपीएससी ने राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षण देने का विवादास्पद निर्णय वापस ले लिया। इस व्यवस्था में आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के साथ इंटरव्यू में भी आरक्षण दिया गया था। शुक्रवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस आरक्षण को लेकर उठे विवाद पर आयोग से नाराजगी जताई थी।


मुख्यमंत्री ने यूपीपीएससी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई से पहले निर्णय लेने को कहा था। वैसे उन्होंने गुरुवार को ही आयोग के चेयरमैन अनिल यादव को लखनऊ तलब कर लिया था। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद आयोग ने नए आरक्षण नियम को वापस ले लिया।

अब पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही परीक्षा होगी। बीते सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रों की अपील पर नई आरक्षण व्यवस्था पर रोक लगा दी थी। राज्य में 2011 की परीक्षा के सफल प्रत्याशियों के इंटरव्यू पर भी रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार से जाति आधारित इस नई व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा था। उसके बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था।


छात्रों पर लगाए मुकदमे भी वापस होंगे

इंटरव्यू के लिए चयनित 1650 छात्रों में केवल 238 छात्र सामान्य वर्ग के थे। इसके विरोध में इलाहाबाद व अन्य जगहों पर छात्रों ने तोडफ़ोड़ की थी। उन पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। राज्य सरकार ने ये मुकदमे भी वापस लेने की घोषणा की है।

आगे की स्लाइड्स में जानें क्यों शुरू हुआ ये आंदोलन और कैसे फैली इलहाबाद में हिंसा

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