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निठारी कांड EXCLUSIVE: पहली बार सामने आई कोली की बीवी, बच्चों सहित डासना जेल में की मुलाकात

7 वर्ष पहले
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फोटो: बच्चों सहित सुरेंद्र कोली से मिलने डासना जेल पहुंची पत्नी शांति देवी।
गाजियाबाद. निठारी कांड में फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली से मिलने आठ साल में पहली बार उसकी पत्नी शांति देवी अपने बच्चों के साथ रविवार को गाजियाबाद के डासना जेल पहुंचीं। उनके साथ कोली का भाई चंदन कोली और अल्मोड़ा के जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह भी थे। शांति देवी के साथ कोली की बेटी (11) और बेटा (8) भी आए थे।
कोली से मिलकर जेल से बाहर आईं शांति देवी ने dainikbhaskar.com को बताया कि मुलाकात के दौरान कोली सभी से गले मिला। अपने बच्चों को देखकर भावुक हो उठा। बता दें कि इससे पहले कोली की मां कुंतीदेवी मेरठ जेल में उससे मिलने पहुंची थी। तब कोली ने अपनी मां से कहा था कि वह अपने बेटे को देखना चाहता है, जिससे वह उसके जन्‍म के बाद कभी नहीं मिला था।
शांति देवी के मुताबिक, यदि उसका पति दोषी है तो उसका सबूत उसे भी दिखाया जाए और उसके सामने ही उसको फांसी दे दी जाए। यदि उसे सबूत नहीं दिखाया गया, तो उसको भी कोली की तरह सजा दी जाए। कोली ने बताया कि मामले में आरोपी रहे मोनिंदर सिंह पंढेर ने उससे सारे गुनाह अपने सिर लेने काे कहा था और भरोसा दिलाया था कि बाद में वह उसे छुड़ा लेगा।
उनके मुताबिक, कोली ने उसे बताया कि उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। उसे धमकी दी जा रही है कि यदि उसने सारे इल्जाम अपने सिर पर नहीं लिए तो उसके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। जेल में भी कोली को मारने की कोशिश की गई थी। जेल के ही एक कर्मी को 10 लाख रुपए देकर उसे जहर देने की बात कही गई थी, लेकिन उस शख्स ने कोली को ये बात बता दी और वह बच गया। इसके बाद कोली ने अल्मोड़ा के डीएम को लेटर लिखकर मंगरूखाल गांव में रह रही अपनी पत्नी और बच्चों के जान पर खतरे की आशंका जताई थी। इसके बाद डीएम ने गांव के प्रधान से हर तीन-दिन पर उनकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
कोली की पत्नी ने आगे बताया कि मुलाकात के शुरुआती समय में सुरेंद्र परिवार को देखकर रोता रहा। वह खुद भी बदहवाश हो गई थी, लेकिन फिर उसने हिम्मत से काम लिया और उससे पूछा कि सच्चाई क्या है। इस पर कोली ने बताया कि उसे पंढेर ने फंसाया है। उसने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पुलिस और कोर्ट से भीख तक मांगी, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। पुलिस ने तीन महीने तक उसे टॉर्चर किया। उसके पैर के नाखून पिलास से निकाल दिए गए। वह तड़पता रहा। अंत में उसने हालात से हार मान ली। लेकिन फांसी की सजा टलने के बाद उसके मन में एक बार फिर उम्मीद जगी है।
अपनी पैरवी खुद कर रहा है कोली
कोली ने पत्नी को बताया कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ रहा है। उसने वकील हटा दिए है। कोर्ट में अपनी पैरवी खुद कर रहा है। वह कानून की किताबें पढ़ रहा है। उसने न्याय के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार और कई संस्थाओं को पत्र लिखा है। उसने कई अहम कागजात जुटा लिए हैं। इसे वह अगली सुनवाई में अपनी पत्नी को दे सकता है। उसने परिजनों से कहा कि वह अंदर से लड़ेगा और वे उसे बाहर से सपोर्ट करें। सुरेंदर कोली का आरोप है कि उसकी सही बातें बाहर नहीं पहुंच रही हैं।
पत्नी ने कहा- किसी ने नहीं दिया साथ
आठ साल तक सामने नहीं आने पर dainikbhaskar.com द्वारा पूछे गए सवाल पर शांतिदेवी ने कहा कि वह बहुत कमजोर और गरीब है। पढ़ी-लिखी भी नहीं है। इस मामले में किसी ने उसका साथ भी नहीं दिया था। सभी ने उससे नाता तोड़ लिया था। गांव में भी उसने कोली के तीनों भाइयों से गुहार लगाई थी कि वे हर महीने 500-500 रुपए गुजारे के लिए दे दिया करें। 1500 रुपए में वह अपना और दोनों बच्चों का पेट पाल लेगी, लेकिन सभी ने मना कर दिया था।
तंगी से परेशान होकर छह महीने पहले आई दिल्ली
कोली की पत्नी ने बताया कि छह महीने पहले वह दिल्ली आ गई। यहां वह तीन हजार रुपए महीने पर काम करती है। यहीं पर बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया है। जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिलहाल कोली की फांसी टाल गई, तो इसके बाद उसे लगा कि शायद भगवान अब उसकी मदद कर रहा है। इसलिए उसे भी सामने आना चाहिए। कोली से मिलने पर सबसेे पहले उसके मुंह से सच्चाई जानना चाहती थी।
8 साल पहले कोली आया था गांव
शांतिदेवी ने बताया कि आठ साल पहले कोली अपनी बेटी के लिए की गई पूजा में गांव आया था। पूजा के दिन ही मोनिंदर का ड्राइवर भी गांव आ गया था। उसने कोली से कहा था कि साहब ने उसकी सरकारी नौकरी लगवाने के लिए बुलाया है। इसके बाद कोली तुरंत ही गांव से वहां पहुंचा और जाते ही सीबीआई ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसकी कोली से कभी मुलाकात नहीं हुई।
भाई ने कहा- पैसे के बल पर आजाद हो जाएगा पंढेर
चंदन कोली ने कहा कि इस मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर ही मुख्य आरोपी है। उसने सुरेंद्र कोली को फंसा दिया है और पैसे के दम पर खुद आजाद घूम सकता है। पूरे मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए। इसके बाद भी यदि कोली पर भी लगे आरोप साबित होते हैं तो उसे और पंढेर, दोनों को फांसी दी जानी चाहिए। सीबीआई और पुलिस उन्हें कोली से मिलने नहीं दे रही है। कई जगह एप्लीकेशन लगाकर गुहार लगाई है, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है।
कोली को फांसी देने की इतनी जल्दी क्यों?
अल्मोड़ा के जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह कहा कि भारत के संविधान में स्पष्ट है कि कई मुकदमे चल रहे हैं, तो इनमें से सिर्फ एक या दो मुकदमे के आधार पर अपराधी को फांसी नहीं दी जा सकती है। फिर कोली को क्यों जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाने की बात हो रही है? इस कांड में नेशनल या इंटरनेशनल लेवल का रैकट जुड़ा हुआ है। सुरेंद्र कोली के अकेले बस की बात नहीं है कि वह इतने बड़े कांड का अंजाम दे सके।
जेल में मुलाकात के दौरान कोली ने उनको बताया कि नोएडा में पंढेर की कोठी के पास डॉ. नवीन चौधरी रहते हैं। उनके घर से भी काफी चीजें बरामद हुई थीं। इसके बावजूद पूरे केस में उनका कहीं नाम नहीं है। इन सभी लोगों के खिलाफ केस चलना चाहिए।
आगे पढ़िए, सुरेंद्र कोली की पत्‍नी और भाई का एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू...