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गोरखपुर में सरकारी तंत्र से आजिज टीचर ने किया आत्मदाह

7 वर्ष पहले
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फोटो: बड़हलगंज निवासी त्रिलोकी ओझा का शव।
गोरखपुर. गोरखपुर के बड़हलगंज के एक टीचर ने सरकारी तंत्र से परेशान होकर बीते शुक्रवार को खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि उसका अपने परिवार के लोगों से ही जमीनी विवाद चल रहा था, जिसकी सुनवाई में हो रही देरी से वह परेशान रहता था। उसने इस संबंध में एसडीएम को एक चिट्ठी लिखकर आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी। डीएम रंजन कुमार ने अपर जिलाधिकारी वित्त दिनेश चंद्र सिंह को जांच के आदेश दिए हैं। बताते चलें कि इससे पहले बस्ती जिले के पौली गांव की पुष्पा सिंह ने भी सरकारी तंत्र से परेशान होकर खुदकुशी कर ली थी।

आत्मदाह करने वाले शिक्षक अरविंद ओझा गोरखपुर के ओझौली गांव का रहने वाला था। उसके पूर्वजों की करीब एक एकड़ पैतृक जमीन ठाकुर जी के नाम से राजस्व अभिलेख में दर्ज है। इसकी निगरानी अरविंद के बाबा रामप्यारे ओझा करते थे। उनकी मौत के बाद यह जिम्मेदारी अरविंद के पिता बैजनाथ संभाल रहा थे। उनकी मौत के बाद इस जमीन पर चाचा त्रिलोकी का कब्जा ने कब्जा कर लिया। इसे जमीन को त्रिलोकी के बेटे श्रवण ने किसी दूसरे के पास गिरवी रख दिया था।

बताया जा रहा है कि त्रिलोकी ओझा ने बिना बंटवारे कोड़ारी, ओझौली और सोहराभार गांव में स्थित पैतृक जमीन को पट्टीदारों ने बेचना शुरू कर दिया था। इसके लिए अरविंद ने मुकदमा दायर कर रखा था। इस विवाद को लेकर अब तक फैसला नहीं हो पा रहा है। वहीं, न्याय मिलने में हो रही देरी से अरविंद काफी परेशान रहता था। उसने बीते तीन दिसंबर को गोला के एसडीएम को एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें 12 दिसंबर को दिन में 11 बजे ओझौली स्थित शिव मंदिर पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी।

क्या कहते हैं गोला के एसडीएम

एसडीएम मोतीलाल सिंह का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। उसके जमीनी विवाद की फाइल तलाशी जा रही है। मृतक द्वारा 3 दिसंबर को दिया गया प्रार्थना पत्र 10 दिसंबर को ऑफिस के टाइप क्लर्क को मिला था। उस दिन वे राज्य सूचना आयोग लखनऊ से लौट कर आए थे। इस वजह से क्लर्क उनके सामने यह पत्र नहीं दे सका। यदि अरविंद को कोई परेशानी थी, तो उसे मुलाकात करनी चाहिए थी।
आगे पढ़िए डीएम ने दिए जांच के निर्देश...