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मस्‍ि‍जद जाने के लि‍ए औरंगजेब के सि‍पहसालार ने बनवाई थी यह नौ कि‍मी लंबी सुरंग

7 वर्ष पहले
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फोटो: खलीलुर्रहमान द्वारा बनवाई गई नौ किलोमीटर लंबी सुरंग।
गोरखपुर. मुगल साम्राज्य के क्रूर शासकों में शुमार औरंगजेब के सिपहसालार खलीलुर्रहमान ने श्रीनेत राजपूत राजाओं के डर से नौ किलोमीटर लंबी सुरंग बनवाई थी। यह सुरंग खलीलुर्रहमान के वर्तमान में खलीलाबाद स्थित महल से मगहर स्थित जामा मस्जिद के बगल में बने मदरसे तक है। इतिहासविदों और स्थानीय बुजुर्ग जानकारों के मुताबिक, हर जुमे (शुक्रवार) को इसी सुरंग के रास्ते खलीलुर्रहमान जामा मस्जिद मगहर पहुंचता था और नमाज अदा कर फिर उसी रास्ते अपने महल को लौट जाता था। ऐसा वह इसलिए करता था कि श्रीनेत राजपूत राजा कभी भी गुरिल्ला वार के दौरान उसे जान से मार सकते थे।

मुगल शासक शाहजहां का बेटा औरंगजेब ने अपने ही भाइयों दाराशिकोह, शाहशुजा, मुरादबख्श को हराकर मुगल साम्राज्य की गद्दी हासिल की थी। कट्टर धर्मान्ध शासक औरंगजेब विस्तारवादी शासक था। औरंगजेब के शासनकाल में गोरखपुर इलाके में सतासी वंश के राजपूत राजा गज सिंह और जिनकी राजधानी गजपुर गोरखपुर थी और बांसी सिद्धार्थनगर के श्रीनेत राजपूत राजा राम सिंह की राजधानी वर्तमान संतकबीरनगर के मगहर थी। दोनों ही शासक धर्मप्रिय थे।

औरंगजेब का योग्य सिपहसालार था काजी खलीलुर्रहमान

इतिहासकार डॉ. दानपाल सिंह के अनुसार, 1685 ई. पूर्व में औरंगजेब की नजर पूर्वी-उत्तरी क्षेत्र में स्थित गोरखपुर को अपना साम्राज्य का हिस्सा बनाने के लिए अपने एक योग्य सेनानायक काजी खलीलुर्रहमान को गोरखपुर का चकलेदार नियुक्त किया। काजी खलीलुर्रहमान एक विशाल सेना लेकर फैजाबाद के रास्ते गोरखपुर पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए बढ़ा। गोरखपुर पहुंचने से पहले मगहर में बांसी राज्य के राजा राम सिंह से खलीलुर्रहमान का भीषण युद्ध हुआ। सैनिक शक्ति के आगे बांसी राजा को हार का सामना करना पड़ा और वे बांसी चले गए।

मगहर से पश्चिम बनवाया खलीलुर्रहमान ने अपना किला

खलीलुर्रहमान ने मगहर से पश्चिम अपने ही नाम पर खलीलाबाद नगर बसाया और वहीं अपना किला बनवाया। राजपूत राजा मुगल साम्राज्य का खुलकर विरोध करते थे। वे समय-समय पर गुरिल्ला युद्ध कर खलीलुर्रहमान की सेना के सैनिकों को मार डालते थे। हथियार आदि लूट लेते थे। यही कारण था कि खलीलुर्रहमान को खलीलुर्रहमान को भी जान का खतरा था।

आगे पढ़िए डर के बावजूद खलीलुर्रहमान जुमे पर क्‍यों जाता था जामा मस्‍जिद...