चौरीचौरा कांड ने ही बनाया था भगत-राजगुरु और सुखदेव को गरम दल का क्रांतिकारी / चौरीचौरा कांड ने ही बनाया था भगत-राजगुरु और सुखदेव को गरम दल का क्रांतिकारी

स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल तो पहले ही बज चुका था, लेकिन गोरखपुर की महान धरती पर हुए चौरीचौरा कांड ने पूरे आंदोलन की दिशा ही बदल दी।

Mar 23, 2015, 10:28 PM IST
गोरखपुर. स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल तो पहले ही बज चुका था, लेकिन गोरखपुर की महान धरती पर हुए चौरीचौरा कांड ने पूरे आंदोलन की दिशा ही बदल दी। 4 फरवरी 1922 की चौरीचौरा की घटना ने गांधी जी को इस कदर परेशान किया कि उन्होंने अपना असहयोग आंदोलन ही वापस ले लिया। इसी घटना के बाद से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल क्रांतिकारियों का दो दल बन गया था। एक नरम और दूसरा गरम दल।
गरम दल के नायक शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्र शेखर आजाद जैसे कई क्रांतिकारी बने। सेंट्रल असेंबली पर हमला करने का इनका एक मात्र मकसद था कि इनकी राह अलग है, लेकिन उद्देश्य एक है। 23 मार्च, शहीद दिवस के अवसर पर चौरीचौरा में देश की आजादी के नायक, महान क्रांतिकारी शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु और शुखदेव के शहादत पर न तो किसी दल ने कोई कार्यक्रम आयोजित किया और न ही सार्वजनिक स्थान पर कोई सभा हुई।

समाजवादियों ने भगत सिंह को नहीं किया याद

काल मार्क्स के सिद्धांतों से प्रेरित समाजवाद के पोषक शहीदे आजम भगत सिंह को समाजवादियों ने ही नहीं पूंछा। सभी सिर्फ समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की 105वीं जयंती मनाने में व्‍यस्‍त रहे। इसे लेकर कई जगह कार्यक्रम भी हुए। कलेक्ट्रेट के वकीलों ने भी पूरे समाजवादी ढंग जमीन पर बैठकर लोहिया को याद किया। कई जगह हुए आयोजनों में कहीं भी इन देश भक्तों की फोटो तक नजर नहीं आई, माला चढ़ना तो दूर जब इन लोगों से क्रांतिकारियों की उपेक्षा करने का सवाल किया तभी शर्मिंदा थे। वहीं जब इन्हें सम्मान देने की बात सपा जिला अध्यक्ष से की गई तो उन्‍होंने मुलायम और लोहिया का गुणगान करने में ही ज्यादा भला समझा।

कुछ सामाजिक संगठनों ने शहीदों को किया याद

शहर में लगी भगत सिंह की प्रतिमा पर एक सामाजिक संगठन के कुछ लोगों ने फूल–माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। लोगों का कहना है कि नेताओं को सम्मान देने के लिए देश भक्तों को भुला देना ठीक नहीं है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने शाम को कैंडल मार्च कर शहीद क्रांतिकारियों को याद किया।

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