गोरखपुर. हर स्टूडेंट का यह सपना होता है कि उसका नाम यूनिवर्सिटी के मेधावियों की सूची में दर्ज हो। इसमें से कुछ छात्रों की ख्वाहिश शनिवार को पूरी हुई। डीडीयू के 33वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को सम्मानित किया गया। इस बार लड़कियां-लड़कों पर भारी पड़ी। सम्मानित होने वाले स्टूडेंट्स के हौसलें यहीं नहीं रूके। मेधावियों का कहना था कि अभी तो उड़ान शुरू हुई है। ज्यादातर मेधावी आइएएस बनने की चाह रखते हैं।
विवि के सत्र (2013-14 और 2012-13) में विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक पाने वाले मेधावियों की मेहनत को गोल्ड ने सलाम किया। मेधावियों से बताचीत में ज्यादातर ने सिविल सेवा में अपना कॅरियर बनाने की बात कही। कुछ ने प्रोफेसर के रूप में हमेशा कुछ नया करने की इच्छा जाहिर की। dainikbhaskar.com की टीम ने इन मेधावियों से बताचीत की।
आइएएस बनाना चाहती हैं स्नातक टापर सुरभि अग्रवाल
हांसूपुर निवासी कपड़ा व्यापारी श्याम अग्रवाल और रानी अग्रवाल की बेटी हैं सुरभि अग्रवाल। सुरभि ने साल 2014 की यूनिवर्सिटी की परीक्षा में बीएससी की छात्र के रूप में 80.17 फीसद अंक प्राप्त किए। सुरभि के यह अंक इस साल विवि सहित सभी महाविद्यालयों के स्नातक कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में सर्वोच्च हैं। इन दिनों इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एमएससी गणित की पढ़ाई कर रहीं सुरभि आइएएस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं।
सिविल सेवा में जाना चाहती हैं निष्ठा पाण्डेय
यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर सेंटर में प्रोग्रामर के रूप में कार्यरत सच्चिदानंद पाण्डेय की बेटी निष्ठा सेंट जोसेफ कॉलेज फॉरवूमेन में बीए की छात्र थीं। इस साल की परीक्षा में निष्ठा की लगन रंग लाई और 75.89 फीसद अंक प्राप्त किए। सिविल सेवक के रूप में करियर बनाने की चाह रखने वाली निष्ठा इसके लिए तैयारी भी कर रही हैं।
वहीं स्नातक में स्वर्ण पदक पाने वाली निधि ने अपने माता-पिता से परास्नातक में भी ऐसा ही प्रदर्शन करने का वादा किया है। साथ ही निधि नेट जेआरएफ की तैयारी भी कर रही हैं। मध्यमवर्गीय परिवार की निधि ने अपने अधिकारों को पाने की खातिर हर संघर्ष करने वाली युवती के रूप में पहचान बनाई है।
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