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सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने के लिए राप्ती तीरे बना रेत-शिल्प

7 वर्ष पहले
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फोटोः गोरखपुर यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिर्सिटी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर रेत शिल्प बनाया गया।
गोरखपुर. दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी (डीडीयू) को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर राप्ती नदी के किनारे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह की अगुवाई में आठवें रेत शिल्प रचना कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को राप्ती के तीरे हुआ। रेत शिल्प की इस कड़ी में यूनिवर्सिटी प्रवेश द्वार, सामाजिक गतिविधियों और प्राकृतिक छवि को आधार रखकर, 350 वर्ग फुट के बालू (रेत) पर शिल्प निर्माण किया गया।

प्रोफेसर मनोज कुमार के नेतृत्व में उनके सात शिष्यों डॉ. विवेक चौधरी, विकास शर्मा, संत किशोर चौहान, प्रवीण पांडे, प्रमोद मिश्रा, नन्द किशोर और भास्कर विश्वकर्मा ने रेत शिल्प की रचना शुरू की। देखते-देखते कई पूर्व और वर्तमान छात्र (यूनिवर्सिटी और जीएन पब्लिक स्कूल गोरखपुर) ने रेत शिल्प से जुड़कर कला को बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित किया।
योजना आयोग की बैठक में उठ चुकी है मांग
जानकारी के मुताबिक, 20 मार्च 2008 को सबसे पहले मनोज कुमार द्वारा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चेतना चौराहे पर चित्र निर्माण से इस अभियान की शुरुआत की गई थी। उसके बाद 12 दिसंबर वर्ष-2008 को इस अभियान का पहला रेत शिल्प अभियान राप्ती के तीरे शुरू किया गया। योजना आयोग की बैठक वर्ष-2011 में भी यूपी में सेंट्रेल यूनिवर्सिटी की मांग पर केवल गोरखपुर यूनिवर्सिटी को केंद्र में रखकर चर्चा की गई थी। संसद और विधानसभा में भी कई सांसद और नगर विधायक ने इस प्रस्ताव को उठाया था।
आगे पढ़िए, क्यों सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाना चाहते हैं लोग...