तस्वीर में: दर्शन के लिए कतार में खड़े भक्त।
गोरखपुर. शारदीय नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो गए हैं। पहले दिन भक्तों ने देवी मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की। कलश स्थापना के साथ ही शुरू हुई देवी की पूजा दशमी तक चलेगी। देवी मां की पूजा के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। साथ ही लोगों ने व्रत रखकर दुर्गा मां की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि शैलपुत्री के दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
गोरखपुर में प्रमुख दुर्गोत्सव स्थलों बगहा बाबा मंदिर इंजीनियरिंग कॉलेज, दुर्गा बाड़ी, काली बाड़ी, रेलवे स्टेशन, लोको वर्कशॉप, दीवान बाजार में गुरुवार सुबह से शाम तक कलश स्थापना का कार्य किया गया। विधिवत पूजन के बाद षष्टी के दिन मां की प्रतिमा इन जगहों पर पांडालों में स्थापित की जाएगी।
दर्शन से होते हैं वैवाहिक कष्ट दूर
पंडित शरत चंद्र मिश्र के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री के ध्यान से होती है। हिमालय में जन्म लेने से उन्हें शैलपुत्री कहा गया। इनका वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। इन्हे पार्वती का स्वरूप भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी। इनके दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
शैलपुत्री पूर्वजन्म में थी सती
हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूर्व जन्म में शैलपुत्री दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थी, जिनका
विवाह शिव से हुआ था। पिता दक्ष द्वारा शिव का अपमान करने पर उन्होंने स्वयं को योगाग्नि द्वारा भष्म कर लिया था। वही सती अगले जन्म में शैलपुत्री के रूप में जन्मीं। इन्हें ही माता पार्वती भी कहा जाता है।
आगे तस्वीरों में देखिए मंदिरों में देवी दर्शन के लिए लगी भक्तों की कतार...