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BRD मेडिकल के अंदर का सचः खराब पड़ी हैं करोड़ों की मशीनें- बाहर सप्लाई होती हैं महंगी दवाइयां

3 वर्ष पहले
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गोरखपुर.    बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद कमीशन के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने का दावा किया जा रहा है। इसकी सच्चाई जानने के लिए DainikBhaskar.com ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स, नर्स और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरों से बात की। पता चला कि हॉस्पिटल में कई इक्विपमेंट्स (उपकरण) और जरूरी दवाओं की कमी है। इस वजह से नाॅर्मल ऑपरेशन भी एक महीने तक लेट हो जाते हैं। कमीशनखोरी इस कदर हावी है कि मशीनों का रख-रखाव तक नहीं होता है। बता दें कि कुछ दिन पहले हॉस्पिटल में इन्सेफलाइटिस से पीड़ित 30 बच्चों समेत 60 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसा है सर्जरी डिपार्टमेंट का हाल...
 
- सर्जरी डिपार्टमेंट से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया, ''यहां ड्रायर स्टरलाइजेशन मशीन की कमी है। इससे ऑपरेशन थिएटर को स्टेरेलाइज करती हैं। रूटीन ओटी में एक मशीन है, लेकिन वो भी खराब है। डिपार्टमेंट में तीन सी आर्म्स मशीनें हैं। एक नई और 2 पुरानी, जिन्हें रिपेयर करना जरूरी है, लेकिन पेमेंट बकाया होने से ऐसा नहीं हो पा रहा है।''
- ऑर्थोपेडिक और सर्जरी के डॉक्टर ने कहा, ''कमीशन के चक्कर में मशीनों की रिपेयरिंग नहीं हो रही है। इससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। मशीनों की कमी से ऑपरेशन डेढ़ महीने तक लेट होते हैं। हमें  मजबूरी में मरीजों को झूठ बोलना पड़ता है कि मशीन ठीक होने में वक्त लगेगा।''
- इन्सेफलाइटिस वार्ड से जुड़े डॉक्टर के मुताबिक, ''बच्चों की सिकाई के लिए वार्मर की जरूरत है। कई बार लिखकर दे चुके हैं, लेकिन कमीशन की डील अटकी है। सीएम योगी ने खरीद के आदेश भी दे दिए हैं, लेकिन अब तक कोई कारवाई नहीं हुई। वार्ड में जरूरत से कम 14 बेड हैं, जबकि सीएम ने पहले दौरे पर इन्हें बढ़ाने का ऑर्डर दिया था।''
 
हॉस्पिटल के OT में एसी खराब
- डॉक्टर्स के मुताबिक, ''ऑपरेशन थिएटर में लगी मशीनों को सही रखने के लिए एसी की जरूरत होती है। कुछ ओटी में एसी खराब हैं। ओटी में ड्रेस और चप्पल की जरूरत होती है, यहां वो भी नहीं हैं।''
- हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े एक अफसर ने बताया, ''पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की निजी पैथालॉजी चलती है। शहर में उनकी 3 पैथ लैब हैं, एक मेडिकल कॉलेज के सामने, गोलघर और बेतियाहाता में हैं। अगर जांच हो तो सब सामने आ जाएगा।''
 
हॉस्पिटल का सामान बेचने का दावा
- इन्सेफलाइटिस वार्ड में तैनात नर्स के मुताबिक, ''यहां जरूरी दवाओं की कमी है। कुछ दवाओं को छोड़कर सब बाहर से मंगानी पड़ती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रांडेड दवाओं पर कमीशन कम मिलता है। छोटे-छोटे सामान जैसे इंट्राकैप वगैरह खरीदे तो मेडिकल कॉलेज के लिए जाते थे, लेकिन कुछ सामान बाहर बेच दिया जाता है।''
- दूसरी नर्स ने बताया, ''अगर हमारा एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रांसफर भी हुआ है तो घूस देना पड़ता है। वार्ड ब्वॉय भी ऐसा ही करते हैं। भर्तियों में भी पैसा चलता है। इन्हें नर्क में भी जगह न म‍िले।''
 
हेल्थ ड‍िपार्टमेंट को मामले की जानकारी नहीं 
- हेल्थ ड‍िपार्टमेंट के प्र‍िंस‍िपल सेक्रेटरी हेल्थ प्रशांत त्रिवेदी ने बताया, ''मशीनों के खराब होने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में बीआरडी मेडिकल काॅलेज के अफसरों से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।''
 
क्या कहना है हेल्थ म‍िन‍िस्टर का?
- यूपी सरकार के हेल्थ म‍िन‍िस्टर और स्पोक्सपर्सन सिद्धार्थनाथ स‍िंह ने कहा, ''डीएम और बनाई गई कमेटी की र‍िपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा। फिलहाल मेड‍िकल कॉलेज के प्र‍िंस‍िपल और वाइस प्र‍िंस‍िपल को सस्पेंड किया गया है। कंपनी की भूमिका की भी जांच चल रही है।''
 
योगी झूठ बोल रहे हैं- कांग्रेस  
- इस मामले में पर यूपी कांग्रेस चीफ राज बब्बर ने कहा, ''जिस तरह सीएम योगी ने बच्चों की मौत पर झूठ बोला है, उसका पर्दाफाश करने के लिए कांग्रेस विधानसभा जाकर सीएम का इस्तीफा देने के लिए बाध्य करेगी।''
- ''योगी खुद गोरखपुर में कई साल से सांसद हैं, लेक‍िन उन्हें अपने ही इलाके की समझ नहीं है। इन मौतों की जिम्मेदार प्रदेश सरकार और प्रदेश सरकार के मुखिया की है। जिम्मेदारी से बचने के लिए अफसरोंं और डाॅक्टरों पर गाज गिराई जा रही है।''

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